विस्तृत उत्तर
नवीन दुकान/व्यवसाय का शुभारम्भ मंदिर में पूजा करवाकर करना अत्यन्त शुभ और प्रचलित परम्परा है।
कब करवाएँ
- ▸नवीन दुकान/ऑफिस उद्घाटन
- ▸व्यापार का नया वर्ष (दीपावली — व्यापार नववर्ष)
- ▸हिन्दू नववर्ष (चैत्र प्रतिपदा)
- ▸अक्षय तृतीया — नवीन व्यवसाय शुभारम्भ
मंदिर में पूजा
1किस देवता से
- ▸गणपति — विघ्न निवारण (सर्वप्रथम)
- ▸लक्ष्मी — धन-समृद्धि (व्यापार प्रमुख)
- ▸कुबेर — धन रक्षा
- ▸विष्णु/कृष्ण — सम्पूर्ण कल्याण
2मंदिर में विधि
- ▸गणपति+लक्ष्मी अर्चना करवाएँ
- ▸अभिषेक (यदि शिव मंदिर)
- ▸विशेष भोग अर्पित (लड्डू/पंचामृत)
- ▸दीपदान (घी का दीपक)
- ▸दान (अन्नदान/वस्त्रदान)
- ▸प्रसाद — दुकान पर ले जाकर वितरित
3दुकान पर पूजा (मंदिर से लौटकर)
- ▸दुकान प्रवेश: कलश लेकर, दाहिने पैर से
- ▸गणपति-लक्ष्मी स्थापना (दुकान में)
- ▸हवन (छोटा — गणपति मंत्र)
- ▸स्वस्तिक (कुंकुम से दरवाजे पर)
- ▸नारियल तोड़ना
- ▸दीपक + आरती
- ▸शुभ लाभ लिखना (हिन्दी/गुजराती)
- ▸प्रथम ग्राहक = लक्ष्मी रूप (सम्मान से)
4दीपावली पूजा (वार्षिक)
दीपावली = व्यापार नववर्ष। लक्ष्मी-गणेश पूजा, नवीन बही-खाता, तिजोरी पूजा = व्यापारी वर्ग की सबसे बड़ी पूजा।
दक्षिणा/दान
व्यापार लाभ का एक अंश नियमित दान = लक्ष्मी कृपा स्थायी।





