विस्तृत उत्तर
कलश यात्रा मंदिर के विशेष अवसरों (प्राण प्रतिष्ठा, वार्षिक उत्सव, नवरात्रि, कुम्भाभिषेक) पर निकाली जाने वाली पवित्र शोभायात्रा है।
कलश यात्रा क्या है
पवित्र कलश (जल से भरा, नारियल+मांगो पत्ते+लाल कपड़ा) को मंदिर से निकालकर पवित्र जलाशय (नदी/सरोवर) तक ले जाना, वहाँ से जल भरकर मंदिर वापस लाना = कलश यात्रा।
कब निकालें
- ▸मंदिर प्राण प्रतिष्ठा/कुम्भाभिषेक से पूर्व
- ▸नवरात्रि प्रारम्भ (कलश स्थापना)
- ▸मंदिर वार्षिकोत्सव
- ▸विशेष पर्व/जयन्ती
कलश यात्रा विधि
1पूर्व तैयारी
- ▸शुभ मुहूर्त निश्चय
- ▸मार्ग निर्धारण (मंदिर → जलाशय → मंदिर)
- ▸कलश (ताँबा/पीतल) — संख्या: 1, 5, 9, 11, 108 (अवसर अनुसार)
- ▸सजावट सामग्री — पुष्प माला, तोरण, रंगोली
- ▸वाहन/रथ (बड़ी यात्रा में)
2कलश सजावट
- ▸ताँबे/पीतल का कलश — जल भरा
- ▸कलश पर स्वस्तिक + मांगो पत्ते (5)
- ▸ऊपर नारियल (लाल कपड़े में)
- ▸कलश के गले में लाल/पीला धागा + पुष्प माला
3यात्रा क्रम
- ▸मंदिर में पूजा/संकल्प (प्रारम्भ)
- ▸कलश उठाना — सुमंगली (विवाहित) स्त्रियाँ सिर पर कलश धारण
- ▸शोभायात्रा: ढोल-नगाड़े, शंख, भजन-कीर्तन
- ▸मार्ग में फूल बिखेरना, रंगोली
- ▸जलाशय पर: कलश में पवित्र जल भरना
- ▸मंत्रोच्चार + पूजा
- ▸वापसी — पुनः शोभायात्रा
- ▸मंदिर में कलश स्थापना
- ▸हवन/पूजा/अभिषेक
4कौन भाग लें
- ▸सभी भक्त (जाति-वर्ण भेद नहीं)
- ▸सुमंगली स्त्रियाँ = कलश वाहक (प्राथमिक)
- ▸पुरोहित = मंत्र और विधि
- ▸संगीतकार = भजन/ढोल
5सामग्री सूची
- ▸कलश, नारियल, मांगो पत्ते, लाल कपड़ा
- ▸पुष्प, माला, तोरण, रंगोली
- ▸शंख, ढोल, मंजीरा
- ▸धूप, दीप, कपूर
- ▸जल भरने का पात्र
विशेष — कुम्भाभिषेक
दक्षिण भारत में मंदिर के शिखर (विमान) पर कलश (कुम्भ) स्थापना/नवीनीकरण = कुम्भाभिषेक। 12 वर्ष में एक बार। कलश यात्रा इसका अभिन्न अंग।





