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हवन/यज्ञ📜 वैदिक व्याकरण, यज्ञ शास्त्र1 मिनट पठन

हवन में स्वाहा बोलने का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

'सु+आहा'='अच्छी तरह अर्पित।' अग्नि=देवमुख, स्वाहा=अग्नि पत्नी (पुराण)। 'हे अग्नि, देवता तक पहुंचाओ!' 'इदं न मम'='मेरा नहीं'=समर्पण। बिना स्वाहा=अधूरी।

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विस्तृत उत्तर

'स्वाहा' = अग्नि देवता मुख — अर्थ:

व्युत्पत्ति

  • 'सु' + 'आहा' = 'अच्छी तरह कहा/अर्पित किया।'
  • या: 'स्व' + 'आहा' = 'स्वयं को अर्पित।'

अर्थ

  1. 1अग्नि = देवमुख: अग्नि = देवताओं का मुख। 'स्वाहा' = 'हे अग्नि, यह देवता तक पहुंचाओ!'
  2. 2स्वाहा = अग्नि पत्नी: पुराण: स्वाहा = अग्नि देवता पत्नी। उनका नाम = आहुति शक्ति।
  3. 3समर्पण: 'स्वाहा' = 'मैं समर्पित करता हूं' — अहंकार त्याग।
  4. 4'इदं न मम': 'यह मेरा नहीं' = पूर्ण समर्पण (PhotonNews verified)।

नियम: बिना 'स्वाहा' = आहुति अधूरी। प्रत्येक आहुति = 'स्वाहा' अनिवार्य।

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शास्त्रीय स्रोत
वैदिक व्याकरण, यज्ञ शास्त्र
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