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विस्तृत उत्तर
'स्वाहा' = अग्नि देवता मुख — अर्थ:
व्युत्पत्ति
- ▸'सु' + 'आहा' = 'अच्छी तरह कहा/अर्पित किया।'
- ▸या: 'स्व' + 'आहा' = 'स्वयं को अर्पित।'
अर्थ
- 1अग्नि = देवमुख: अग्नि = देवताओं का मुख। 'स्वाहा' = 'हे अग्नि, यह देवता तक पहुंचाओ!'
- 2स्वाहा = अग्नि पत्नी: पुराण: स्वाहा = अग्नि देवता पत्नी। उनका नाम = आहुति शक्ति।
- 3समर्पण: 'स्वाहा' = 'मैं समर्पित करता हूं' — अहंकार त्याग।
- 4'इदं न मम': 'यह मेरा नहीं' = पूर्ण समर्पण।
नियम: बिना 'स्वाहा' = आहुति अधूरी। प्रत्येक आहुति = 'स्वाहा' अनिवार्य।
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