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जप आसन प्रश्नोत्तर — 2 प्रश्न

जप आसन से जुड़े 2 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 2 प्रश्न

मंत्र जप करते समय कौन सा आसन सही है?

जप आसन: कुश या ऊनी — भूमि पर सीधे नहीं (ऊर्जा absorb हो जाती है)। मुद्रा: सिद्धासन या सुखासन — रीढ़ सीधी। गीता 6.11: 'न अधिक ऊँचा, न नीचा, स्थिर।' एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है।

आसनकुशपद्मासन
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मंत्र जप करते समय कौन सा आसन सही है?

जप के लिए पद्मासन सर्वोत्तम है। सुखासन (पालथी) और सिद्धासन भी उत्तम हैं। रीढ़ सीधी रखना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। कुश या ऊनी आसन पर बैठें — भूमि पर सीधे नहीं। बैठते समय 'ॐ आसनाय नमः' बोलें।

आसनजप आसनपद्मासन
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जप आसन — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर जप आसन श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

जप आसन को गहराई से समझने का तरीका

जप आसन प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

2 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।