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तिथि श्राद्ध प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

तिथि श्राद्ध से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

क्या द्वितीया स्वाभाविक मृत्यु वालों के लिए है?

हाँ, द्वितीया श्राद्ध मुख्यतः स्वाभाविक मृत्यु वाले पितरों के लिए है। यदि स्वाभाविक मृत्यु द्वितीया को हुई हो, तो श्राद्ध भी द्वितीया को होगा। परंतु अकाल मृत्यु शस्त्र-विष-दुर्घटना से द्वितीया को हुई हो, तो श्राद्ध चतुर्दशी को होगा। सधवा स्त्री का नवमी को, संन्यासी का द्वादशी को, और तिथि अज्ञात हो तो सर्वपितृ अमावस्या को।

स्वाभाविक मृत्युद्वितीया अधिकारश्राद्ध अपवाद
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द्वितीया तिथि को मरे व्यक्ति का श्राद्ध कब होता है?

द्वितीया तिथि को स्वाभाविक रूप से मरे व्यक्ति का श्राद्ध भी द्वितीया तिथि को ही होता है। शुक्ल या कृष्ण दोनों पक्षों में मृत्यु पर समान नियम है। मृत्यु दिन में हुई हो या रात में, मृत्यु के समय जो तिथि थी, वही श्राद्ध तिथि मानी जाती है। परंतु अकाल मृत्यु पर चतुर्दशी, सधवा पर नवमी, और संन्यासी पर द्वादशी को श्राद्ध होगा।

द्वितीया मृत्युश्राद्ध तिथिस्वाभाविक मृत्यु
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द्वितीया श्राद्ध 2026 में कब है?

द्वितीया श्राद्ध 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को सम्पन्न होगा। यह पितृ पक्ष यानी महालय का दूसरा दिन है, प्रतिपदा के बाद। सटीक दिनांक स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित होगा। श्राद्ध कुतप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त, या अपराह्न काल में किया जाना चाहिए। तिथि वृद्धि होने पर अगले दिन और क्षय होने पर अपराह्न स्पर्श वाले दिन।

द्वितीया श्राद्ध 2026पितृ पक्ष 2026श्राद्ध तिथि
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कृष्ण पक्ष की द्वितीया का श्राद्ध कब होता है?

कृष्ण पक्ष की द्वितीया का श्राद्ध मुख्यतः पितृ पक्ष यानी आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया को सम्पन्न होता है। यह दिन प्रतिपदा के बाद आता है। पितृ पक्ष की कृष्ण द्वितीया पर पार्वण श्राद्ध होता है, जिसमें तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन होता है। किसी भी मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को मरे पितर का वार्षिक एकोद्दिष्ट श्राद्ध भी उसी कृष्ण द्वितीया को होता है।

कृष्ण पक्ष द्वितीयामहालय श्राद्धपितृ पक्ष
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क्या द्वितीया श्राद्ध शुक्ल पक्ष में भी होता है?

हाँ, द्वितीया श्राद्ध शुक्ल पक्ष में भी होता है। विष्णु पुराण के अनुसार जिन पितरों की मृत्यु किसी भी मास के शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को हुई हो, उनका वार्षिक क्षयाह श्राद्ध उसी द्वितीया तिथि को होता है। पितृ पक्ष का पार्वण श्राद्ध सबके लिए आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया को होता है।

शुक्ल पक्ष द्वितीयाएकोद्दिष्ट श्राद्धक्षयाह श्राद्ध
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दूज का श्राद्ध किसे कहते हैं?

दूज का श्राद्ध द्वितीया तिथि के श्राद्ध का लोक-प्रचलित नाम है। दूज शब्द द्वितीया का सरल हिन्दी रूप है। यह विशेष रूप से उन पितरों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु द्वितीया तिथि को हुई हो, और पितृ पक्ष की दूज पर पार्वण श्राद्ध से सम्पूर्ण कुटुम्ब का श्राद्ध भी सम्पन्न होता है।

दूज श्राद्धद्वितीया तिथिलोकभाषा
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द्वितीया श्राद्ध क्या है?

द्वितीया श्राद्ध वह श्राद्ध कर्म है जो किसी भी मास की द्वितीया तिथि को, विशेषकर पितृ पक्ष यानी आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को किया जाता है। इसे सामान्य भाषा में दूज का श्राद्ध भी कहते हैं। यह उन पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु स्वाभाविक रूप से किसी भी पक्ष की द्वितीया तिथि को हुई हो।

द्वितीया श्राद्धदूज श्राद्धतिथि श्राद्ध
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तिथि श्राद्ध — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तिथि श्राद्ध श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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तिथि श्राद्ध को गहराई से समझने का तरीका

तिथि श्राद्ध प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।