विस्तृत उत्तर
द्वितीया श्राद्ध 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को सम्पन्न होगा। शास्त्रीय आधार के अनुसार द्वितीया श्राद्ध आश्विन मास के कृष्ण पक्ष यानी पितृ पक्ष या महालय की द्वितीया तिथि को सम्पन्न किया जाता है।
पितृ पक्ष 2026 की काल-गणना देखें तो पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आता है। यह पूर्णिमा यानी भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलता है। इसमें कुल 16 दिन होते हैं। द्वितीया इस पक्ष का दूसरा दिन है, यानी प्रतिपदा के अगले दिन।
द्वितीया तिथि का गणितीय निर्धारण चन्द्रमा की गति पर निर्भर करता है। चूँकि चान्द्र तिथियाँ सूर्योदय के साथ प्रारम्भ या समाप्त नहीं होतीं, इसलिए कभी-कभी द्वितीया तिथि दो दिन पड़ सकती है यानी वृद्धि या किसी दिन आंशिक रूप से हो सकती है यानी क्षय। निर्णयसिन्धु के अनुसार श्राद्ध का मुख्य काल अपराह्न है, इसलिए जिस दिन अपराह्न काल में द्वितीया का स्पर्श हो, उसी दिन श्राद्ध करना चाहिए।
तिथि वृद्धि की स्थिति में निर्णय इस प्रकार है। यदि द्वितीया तिथि आज अपराह्न काल में भी है और कल भी अपराह्न काल को स्पर्श कर रही है, तो श्राद्ध दूसरे दिन यानी पर-विद्धा किया जाना चाहिए। निर्णयसिन्धु का श्लोक है द्वितीयावृद्धिगामित्वादुत्तरा तत्र चोच्यते अर्थात् द्वितीया की वृद्धि होने पर अगले दिन का ग्रहण करना शास्त्र सम्मत है।
तिथि क्षय की स्थिति में निर्णय अलग है। यदि द्वितीया तिथि का क्षय हो रहा हो यानी वह सूर्योदय के बाद शुरू होकर अपराह्न से पूर्व ही समाप्त हो रही हो, तो जिस दिन अपराह्न काल में द्वितीया का स्पर्श अधिक हो, उसी दिन श्राद्ध करना चाहिए।
द्वितीया श्राद्ध 2026 की सटीक तिथि के लिए स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक है। पंचांग में आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि का प्रारंभ और समाप्ति समय स्पष्ट रूप से बताया जाता है। इसके आधार पर ही श्राद्ध का दिन निर्धारित होता है।
श्राद्ध का सही मुहूर्त भी विशेष है। द्वितीया श्राद्ध के लिए अपराह्न का समय ही शास्त्र-सम्मत है। हिन्दू दिनमान यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 15 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है। श्राद्ध के लिए दिन का आठवाँ और नौवाँ मुहूर्त सर्वोत्तम माना गया है।
कुतप मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है। यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है। समय अनुमानित 11:36 AM से 12:24 PM तक होता है। कु अर्थात् पाप, तप अर्थात् जलाना। जो मुहूर्त पापों को भस्म कर दे, वह कुतप है। यह श्राद्ध का सर्वश्रेष्ठ समय है।
रौहिण मुहूर्त भी अत्यंत पवित्र है। यह दिन का नौवाँ मुहूर्त है। समय अनुमानित 12:24 PM से 01:12 PM तक होता है। कुतप के पश्चात् यह भी श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत पवित्र है।
अपराह्न काल पूरा 01:12 PM से 03:39 PM तक होता है। सम्पूर्ण श्राद्ध प्रक्रिया यानी ब्राह्मण भोजन, पिण्डदान और तर्पण इस काल के समाप्त होने से पूर्व पूर्ण हो जानी चाहिए। ये समय स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं।
यदि 2026 में द्वितीया तिथि दिन में इन मुहूर्तों को स्पर्श नहीं करती है, तो धर्मसिन्धु के नियमों के अनुसार तिथि का निर्णय किया जाता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय पुरोहित या पंचांग की सहायता से सटीक दिन निर्धारित करना चाहिए। शास्त्रीय आधार के रूप में निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु और श्राद्ध-तत्त्व इस सिद्धांत के प्रामाणिक स्रोत हैं। निष्कर्षतः द्वितीया श्राद्ध 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को सम्पन्न होगा। सटीक दिनांक स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित होगा, और श्राद्ध कुतप, रौहिण या अपराह्न काल में करना चाहिए।
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