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न्यास विधि प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

न्यास विधि से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

न्यास से शिवलिंग में क्या होता है?

न्यास से शिवलिंग पर शिव का सूक्ष्म नादमय शरीर निर्मित होता है — मंत्र की चेतना-ऊर्जा अंग-विशेष पर स्थापित होकर एक दिव्य खाका तैयार करती है। यही 'मंत्र प्रवेश' की वास्तविक तांत्रिक विधि है।

न्यास प्रभावनादमय शरीरदिव्य खाका
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शिव के पंचमुखों से संबंधित न्यास मंत्र क्या हैं?

शिव के पंचमुख न्यास मंत्र: 'ॐ सद्योजाताय नमः' (पश्चिम भाग), 'ॐ वामदेवाय नमः' (उत्तर भाग) — इन मंत्रों से शिवलिंग पर स्पर्श करके दिव्य खाका तैयार किया जाता है।

पंचमुखसद्योजातवामदेव
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प्राण प्रतिष्ठा में न्यास कैसे किया जाता है?

न्यास में मंत्र उच्चारण करते हुए उंगलियों से शिवलिंग के भागों का स्पर्श किया जाता है — जैसे 'ॐ सद्योजाताय नमः' से पश्चिम भाग, 'ॐ वामदेवाय नमः' से उत्तर भाग स्पर्श करके शिव का नादमय शरीर निर्मित किया जाता है।

न्यास विधिउंगली स्पर्शशिवलिंग अंग
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न्यास क्या होता है?

न्यास का अर्थ है 'स्थापित करना' — इसमें मंत्र उच्चारण करते हुए उंगलियों से शिवलिंग के विभिन्न भागों का स्पर्श कर मंत्र की चेतना-ऊर्जा स्थापित की जाती है। यह शिव का सूक्ष्म नादमय शरीर निर्मित करने जैसा है।

न्यासमंत्र स्थापनास्पर्श
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न्यास विधि — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर न्यास विधि श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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न्यास विधि को गहराई से समझने का तरीका

न्यास विधि प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।