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ग्रहण प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

ग्रहण से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

ग्रहण के समय मंत्र का प्रभाव सामान्य समय से कितना गुना बढ़ता है

ग्रहण जप = लाख गुना (1,00,000×) फल — 'लक्षगुणमवाप्नोति' (शास्त्र)। सूर्य/चन्द्र ग्रहण दोनों। खग्रास > खण्डग्रास। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा विशेष। गायत्री/महामृत्युंजय। 'लाख गुना'=प्रतीकात्मक — 'अत्यन्त अधिक'। ग्रहण = सर्वोत्तम साधना अवसर।

ग्रहणमंत्र जपलाख गुना
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चंद्र ग्रहण में पूजा और जप कैसे करें

चन्द्र ग्रहण: सूतक ~9 घंटे पूर्व। भोजन पर कुश+तुलसी। स्नान → कुश आसन → गायत्री/सोम मंत्र/महामृत्युंजय जप → ध्यान। मोक्ष बाद: स्नान → पूजा → दान → ब्राह्मण भोजन। भोजन/शयन वर्जित (ग्रहण काल)। जप = लाख गुना फल।

चन्द्र ग्रहणपूजाजप
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ग्रहण के समय मंत्र जप का क्या विशेष प्रभाव होता है

ग्रहण जप = लाख गुना फल (शास्त्रीय मान्यता)। गायत्री, महामृत्युंजय, इष्ट मंत्र। सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'। चन्द्र: 'ॐ सोमाय नमः'। स्पर्श से मोक्ष तक निरन्तर। कुश आसन + पवित्री। मोक्ष बाद स्नान + दान।

ग्रहणमंत्र जपसूर्य ग्रहण
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ग्रहण काल में कुश का प्रयोग क्यों करते हैं

ग्रहण में कुश: कुश = सर्वाधिक पवित्र तृण, सात्विक ऊर्जा। भोजन/जल पर रखने से ग्रहण का दूषित प्रभाव निष्प्रभ। तुलसी पत्र भी साथ। कुश पवित्री पहनकर जप। मान्यता: कुश नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करता है। बिना कुश का भोजन ग्रहण बाद त्याज्य (कुछ परम्पराओं में)।

ग्रहणकुशदर्भ
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ग्रहण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ग्रहण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ग्रहण को गहराई से समझने का तरीका

ग्रहण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।