ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पद्म पुराण प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

पद्म पुराण से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

यमुना ने यमराज को क्या किया?

यमुना ने द्वितीया तिथि पर अपने भाई यमराज को स्वगृहे यानी अपने घर में आदरपूर्वक भोजन कराया और उनकी अर्चना की। पद्म पुराण का श्लोक है यमो यमुनया पूर्वं भोजितः स्वगृहेऽर्चिता। यमुना और यमराज दोनों सूर्य-देव की सन्तान हैं। यमुना के इस भ्रातृ-प्रेम से यमराज अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने द्वितीया तिथि को महोत्सर्ग घोषित किया।

यमुना यमराज कथाभोजन अर्चनाभाई बहन प्रेम
पूरा उत्तर पढ़ें →

द्वितीया तिथि का यमराज से क्या सम्बन्ध है?

द्वितीया तिथि का यमराज से विशेष और शाश्वत सम्बन्ध है। यमराज मृत्यु के देवता और पितरों के स्वामी हैं। पद्म पुराण के अनुसार यमुना ने यमराज को द्वितीया तिथि पर भोजन कराया था, जिससे यमराज ने इस तिथि को महोत्सर्ग घोषित किया। तब से द्वितीया तिथि मात्र पर यमराज का विशेष आधिपत्य रहता है, और इस दिन श्राद्ध करने से पितरों को विशेष राहत मिलती है।

यमराज द्वितीयायम आधिपत्यमृत्यु देवता
पूरा उत्तर पढ़ें →

यम-द्वितीया क्या है?

यम-द्वितीया कार्तिक शुक्ल द्वितीया का एक विशेष नाम है। पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में देवी यमुना ने इसी तिथि पर अपने भाई यमराज को घर में आदरपूर्वक भोजन कराया था। प्रसन्न यमराज ने द्वितीया को महोत्सर्ग घोषित किया, और नरक के जीवों को भी तृप्ति दी। इसे भाई-दूज या भ्रातृ-द्वितीया भी कहते हैं।

यम-द्वितीयाभ्रातृ द्वितीयायमराज
पूरा उत्तर पढ़ें →

पद्म पुराण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पद्म पुराण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

पद्म पुराण को गहराई से समझने का तरीका

पद्म पुराण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।