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ग्रह शांति प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

ग्रह शांति से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

शनि देव का तांत्रिक मंत्र और जप का समय

शनि के तांत्रिक मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का जप हमेशा सूर्यास्त के बाद या रात्रि में, पश्चिम मुख होकर काले हकीक की माला से करना चाहिए।

शनितांत्रिक मंत्रसाढ़ेसाती
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मानसिक शांति के लिए बुद्ध मंत्र

तनाव और मानसिक अशांति दूर करने के लिए बुध ग्रह का बीज मंत्र 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' जपना चाहिए। यह मस्तिष्क की नसों को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है।

मानसिक शांतिबुध ग्रहबुद्धि
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शुक्र ग्रह शांति पूजा कैसे करें

शुक्र शान्ति: (1) बीज मंत्र जप (16,000) + हवन (श्वेत चन्दन, तिल)। (2) लक्ष्मी पूजा/श्री सूक्त — अधिदेवता। (3) शुक्रवार व्रत। उपाय: श्वेत वस्तुएँ दान, गाय सेवा, स्त्री सम्मान। रत्न: हीरा/ओपल। शुक्र = सौन्दर्य, विवाह, ऐश्वर्य कारक।

शुक्रग्रह दोषलक्ष्मी
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केतु दोष शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

केतु शान्ति: (1) केतु बीज मंत्र जप (17,000) + हवन। (2) गणेश पूजा — केतु के देवता। (3) महामृत्युंजय जप। (4) नवग्रह शान्ति। (5) नागबलि पूजा (त्र्यम्बकेश्वर)। उपाय: कुत्ते की सेवा, दूर्वा दान। रत्न: लहसुनिया। ज्योतिषी से कुण्डली दिखाकर करवाएँ।

केतुग्रह दोषशांति पूजा
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बुध ग्रह शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

बुध शान्ति: (1) बुध बीज मंत्र जप (9,000/17,000) + हवन (अपामार्ग)। (2) विष्णु सहस्रनाम — बुध के अधिदेवता। (3) नवग्रह पूजा। (4) बुधवार व्रत। उपाय: हरे मूंग/वस्त्र दान, बच्चों को भोजन। रत्न: पन्ना (Emerald)। बुध शुभ-अशुभ दोनों — कुण्डली देखकर करें।

बुधग्रह दोषशांति पूजा
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ग्रह शांति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ग्रह शांति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ग्रह शांति को गहराई से समझने का तरीका

ग्रह शांति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।