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श्रीयंत्र और धातु प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

श्रीयंत्र और धातु से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

रजत निर्मित श्रीयंत्र का क्या फल है?

रजत निर्मित श्रीयंत्र 'मध्यम' है — इसका फल 'कोटिगुणा' (करोड़ गुना) होता है और यह 22 वर्षों तक पूर्ण प्रभाव से फल देता है।

रजत श्रीयंत्रकोटिगुणा22 वर्ष
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स्वर्ण निर्मित श्रीयंत्र का क्या फल है?

स्वर्ण निर्मित श्रीयंत्र 'उत्तम' है — इसका फल 'अनंतगुणा' होता है और यह आजीवन फलदायी रहता है। यह एक दिव्य बैटरी जैसा है जो कभी क्षीण नहीं होती।

स्वर्ण श्रीयंत्रअनंतगुणा फलआजीवन
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श्रीयंत्र की पूजा से क्या लाभ होता है?

श्रीयंत्र की नित्य पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है — इसकी कृपा से धन, समृद्धि, यश, कीर्ति, अष्टसिद्धि और नवनिधि मिलती है।

श्रीयंत्र लाभअष्टसिद्धि नवनिधिधन समृद्धि
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श्रीयंत्र को 'यंत्रराज' क्यों कहते हैं?

श्रीयंत्र समस्त यंत्रों में सर्वश्रेष्ठ 'यंत्रराज' है — यह आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप है और इसके दर्शन मात्र से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यंत्रराजसर्वश्रेष्ठ यंत्रश्रीयंत्र
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श्रीयंत्र क्या है?

श्रीयंत्र स्वयं आदिशक्ति माँ त्रिपुर सुंदरी का ज्यामितीय स्वरूप है — यह संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और लय का प्रतीक है और साधक को चेतना के उच्च स्तर से जोड़ता है।

श्रीयंत्रआदिशक्तित्रिपुर सुंदरी
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श्रीयंत्र और धातु — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीयंत्र और धातु श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीयंत्र और धातु को गहराई से समझने का तरीका

श्रीयंत्र और धातु प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।