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दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

स्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?

स्कंद पुराण (काशी खंड, 71वाँ अध्याय): दुर्गमासुर ने वेद चुराए → देवताओं की शक्ति क्षीण → आद्याशक्ति का आह्वान → देवी पार्वती ने महाभयंकर रूप धारण कर दुर्गमासुर का वध किया → देवताओं-ऋषियों ने घोषणा: यह रौद्र रूप 'दुर्गा' कहलाएगा।

दुर्गमासुरस्कंद पुराणनामकरण
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देव्युपनिषद में 'दुर्गा' की क्या व्याख्या है?

देव्युपनिषद 28वाँ श्लोक: 'यस्याः परतरं नास्ति सैषा दुर्गा प्रकीर्तिता।' अर्थ: सम्पूर्ण अस्तित्व में जिनसे श्रेष्ठ या परे कोई सत्ता नहीं — वही 'दुर्गा' हैं। वे दुराचार (पाप) का विनाश करने वाली और संसार रूपी भवसागर से पार उतारने वाली हैं।

देव्युपनिषददुर्गा व्याख्याभवसागर तारिणी
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'दुर्गा' शब्द का क्या अर्थ है?

'दुर्गा' = 'दुर्ग' (अभेद्य किला) से व्युत्पन्न — जिसे पार करना, परास्त करना या जिस तक पहुँचना अत्यंत कठिन (दुर्गम) हो। देवी = 'अजेय' और 'अपराजेय'। तैत्तिरीय आरण्यक और ऋग्वेद में भी इनका उल्लेख।

दुर्गा शब्द अर्थदुर्गअजेय अपराजेय
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माँ दुर्गा कौन हैं?

माँ दुर्गा परब्रह्म स्वरूपिणी, आद्याशक्ति और अखिल ब्रह्मांड की उत्पत्तिकर्ता हैं। देवी भागवत पुराण उन्हें जगज्जननी, मार्कण्डेय पुराण उन्हें महिषासुरमर्दिनी और देवी उपनिषद उन्हें एकमात्र परमसत्य (ब्रह्म) मानता है।

माँ दुर्गाआद्याशक्तिपरब्रह्म
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दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति को गहराई से समझने का तरीका

दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।