विस्तृत उत्तर
संस्कृत व्याकरण और निरुक्त के अनुसार 'दुर्गा' शब्द अत्यंत गूढ़ अर्थ रखता है। यह शब्द मूल रूप से 'दुर्ग' शब्द से व्युत्पन्न है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — एक ऐसा अभेद्य किला जिसे पार करना, परास्त करना या जिस तक पहुँचना अत्यंत कठिन (दुर्गम) हो। देवी के इस स्वरूप को 'अजेय' और 'अपराजेय' माना गया है।
वैदिक साहित्य में, विशेष रूप से तैत्तिरीय आरण्यक और ऋग्वेद में भी दुर्गा और उनसे संबंधित शब्दों का उल्लेख मिलता है, जो उनके प्राचीनतम अस्तित्व को प्रमाणित करता है।





