वन दुर्गा अष्टाक्षर मंत्र
(सर्वसिद्धि एवं सुरक्षा हेतु)
मंत्र
देवता
देवता: वन दुर्गा (देवी दुर्गा का वन में निवास करने वाला स्वरूप)।
स्रोत
स्रोत: इसका स्पष्ट पौराणिक स्रोत उपलब्ध नहीं है, किन्तु यह दुर्गा के विशिष्ट रूपों की साधना परंपरा का अंग है।
प्रयोजन
प्रयोजन: सर्वसिद्धि, सभी प्रकार की बाधाओं से सुरक्षा, आत्मिक बल की प्राप्ति।
विधि
विधि:
- साधना का प्रारंभ पवित्रीकरण, आचमन और संकल्प से करें।
- इसके उपरांत अंगन्यास, वर्णन्यास एवं तत्वन्यास करने का विधान है।
- मूल मंत्र का जप रक्त चंदन, स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से 11, 51, या 108 माला तक किया जा सकता है।
- जप के उपरांत देवी कवच का पाठ भी उत्तम माना गया है।
- 1 दिनों में 25000 मंत्र जप के पश्चात् दशांश हवन का भी विधान है।
महत्व
महत्व: नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) देवी दुर्गा का सर्वाधिक प्रसिद्ध मंत्र है। तथापि, यह अष्टाक्षर वन दुर्गा मंत्र एक विशिष्ट एवं अपेक्षाकृत अल्पज्ञात मंत्र है जो विशेष रूप से वनों, प्रकृति से सम्बंधित बाधाओं और गूढ़ साधनाओं में प्रभावी माना जाता है। इसकी साधना साधक को आंतरिक शक्ति और निर्भयता प्रदान करती है।






