विस्तृत उत्तर
दक्षिण भारत के मन्दिरों में आगम पद्धति से पूजा की सुदीर्घ और सुव्यवस्थित परम्परा है। यहाँ के प्रमुख मन्दिर — तिरुमला (तिरुपति), श्रीरंगम, मीनाक्षी (मदुरै), तंजावुर, चिदम्बरम् आदि — सभी आगम विधि से संचालित होते हैं।
दक्षिण भारत में प्रचलित आगम पद्धतियाँ
1वैखानस आगम
- ▸प्रमुख रूप से विष्णु मन्दिरों में।
- ▸तिरुमला तिरुपति बालाजी मन्दिर में वैखानस आगम का पालन होता है।
- ▸विखनस ऋषि की परम्परा पर आधारित।
- ▸नित्य पूजा, उत्सव, अभिषेक आदि सब वैखानस आगम अनुसार।
2पाञ्चरात्र आगम
- ▸अन्य विष्णु मन्दिरों में (श्रीरंगम आदि)।
- ▸भगवान विष्णु/नारायण द्वारा पाँच रात्रि में दिया गया ज्ञान।
- ▸संहिताओं पर आधारित — जयाख्य, सात्वत, पौष्कर आदि।
3शैवसिद्धान्त आगम
- ▸शिव मन्दिरों में (चिदम्बरम्, तंजावुर, मदुरै आदि)।
- ▸कामिकागम, कारणागम आदि 28 शैव आगम प्रमुख।
दैनिक पूजा क्रम (सामान्य)
प्रातःकालीन पूजा (सुप्रभात/विश्वरूप)
- 1मन्दिर द्वार खोलना — अभिगमन।
- 2देवता को जगाना (सुप्रभात/तिरुप्पावै पाठ)।
- 3अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस (पंचामृत), जल, चन्दन आदि से विग्रह स्नान।
- 4अलंकार — वस्त्र, आभूषण, पुष्पमाला, चन्दन लेपन।
- 5नैवेद्य — भोग अर्पण।
- 6दीपाराधना — कर्पूर आरती, दीपक।
- 7मंत्र पुष्पम् — वैदिक/आगमिक मंत्रों का पाठ।
पूजा संख्या
बड़े मन्दिरों में दिन में 6 काल पूजा होती है:
- ▸उषःकाल (प्रातः)
- ▸कालसन्धि
- ▸उच्चिकाल (मध्याह्न)
- ▸सायंकाल
- ▸अर्धयाम (रात्रि)
- ▸पल्लियरै (शयन)
विशेषताएँ
- ▸आगम शिक्षित (शिवाचार्य/वैखानस ब्राह्मण) ही पूजा कर सकते हैं।
- ▸मन्दिर वास्तु, विग्रह निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा — सब आगम अनुसार।
- ▸उत्सव, रथोत्सव, ब्रह्मोत्सव — सभी आगमिक विधान से।
ध्यान दें: विभिन्न मन्दिरों में आगम की विशिष्ट शाखा अलग हो सकती है, और स्थानीय परम्परा के अनुसार कुछ भिन्नता हो सकती है।





