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पूजा पद्धति📜 पाञ्चरात्र आगम, वैखानस आगम, शैवसिद्धान्त आगम, दक्षिण भारतीय मन्दिर परम्परा2 मिनट पठन

दक्षिण भारत में आगम पद्धति से पूजा कैसे होती है

संक्षिप्त उत्तर

दक्षिण भारत में तीन मुख्य आगम: वैखानस (तिरुपति जैसे विष्णु मन्दिर), पाञ्चरात्र (श्रीरंगम जैसे विष्णु मन्दिर), शैवसिद्धान्त (शिव मन्दिर)। दिन में 6 काल पूजा — अभिषेक, अलंकार, नैवेद्य, दीपाराधना। आगम शिक्षित पुरोहित ही पूजा करते हैं। मन्दिर निर्माण से लेकर उत्सव तक सब आगम अनुसार।

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विस्तृत उत्तर

दक्षिण भारत के मन्दिरों में आगम पद्धति से पूजा की सुदीर्घ और सुव्यवस्थित परम्परा है। यहाँ के प्रमुख मन्दिर — तिरुमला (तिरुपति), श्रीरंगम, मीनाक्षी (मदुरै), तंजावुर, चिदम्बरम् आदि — सभी आगम विधि से संचालित होते हैं।

दक्षिण भारत में प्रचलित आगम पद्धतियाँ

1वैखानस आगम

  • प्रमुख रूप से विष्णु मन्दिरों में।
  • तिरुमला तिरुपति बालाजी मन्दिर में वैखानस आगम का पालन होता है।
  • विखनस ऋषि की परम्परा पर आधारित।
  • नित्य पूजा, उत्सव, अभिषेक आदि सब वैखानस आगम अनुसार।

2पाञ्चरात्र आगम

  • अन्य विष्णु मन्दिरों में (श्रीरंगम आदि)।
  • भगवान विष्णु/नारायण द्वारा पाँच रात्रि में दिया गया ज्ञान।
  • संहिताओं पर आधारित — जयाख्य, सात्वत, पौष्कर आदि।

3शैवसिद्धान्त आगम

  • शिव मन्दिरों में (चिदम्बरम्, तंजावुर, मदुरै आदि)।
  • कामिकागम, कारणागम आदि 28 शैव आगम प्रमुख।

दैनिक पूजा क्रम (सामान्य)

प्रातःकालीन पूजा (सुप्रभात/विश्वरूप)

  1. 1मन्दिर द्वार खोलना — अभिगमन।
  2. 2देवता को जगाना (सुप्रभात/तिरुप्पावै पाठ)।
  3. 3अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस (पंचामृत), जल, चन्दन आदि से विग्रह स्नान।
  4. 4अलंकार — वस्त्र, आभूषण, पुष्पमाला, चन्दन लेपन।
  5. 5नैवेद्य — भोग अर्पण।
  6. 6दीपाराधना — कर्पूर आरती, दीपक।
  7. 7मंत्र पुष्पम् — वैदिक/आगमिक मंत्रों का पाठ।

पूजा संख्या

बड़े मन्दिरों में दिन में 6 काल पूजा होती है:

  • उषःकाल (प्रातः)
  • कालसन्धि
  • उच्चिकाल (मध्याह्न)
  • सायंकाल
  • अर्धयाम (रात्रि)
  • पल्लियरै (शयन)

विशेषताएँ

  • आगम शिक्षित (शिवाचार्य/वैखानस ब्राह्मण) ही पूजा कर सकते हैं।
  • मन्दिर वास्तु, विग्रह निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा — सब आगम अनुसार।
  • उत्सव, रथोत्सव, ब्रह्मोत्सव — सभी आगमिक विधान से।

ध्यान दें: विभिन्न मन्दिरों में आगम की विशिष्ट शाखा अलग हो सकती है, और स्थानीय परम्परा के अनुसार कुछ भिन्नता हो सकती है।

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शास्त्रीय स्रोत
पाञ्चरात्र आगम, वैखानस आगम, शैवसिद्धान्त आगम, दक्षिण भारतीय मन्दिर परम्परा
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