विस्तृत उत्तर
वैखानस और पांचरात्र दोनों वैष्णव (विष्णु उपासना) की प्रमुख पूजा पद्धतियाँ हैं, विशेषतः दक्षिण भारत के मंदिरों में प्रचलित।
वैखानस पद्धति
- 1उत्पत्ति: विखनस मुनि से आरम्भ। कृष्ण यजुर्वेद की तैतिरीय शाखा से सम्बद्ध।
- 2प्रकृति: अधिक प्राचीन और वैदिक परम्परा का अनुसरण। शुद्ध वैदिक मंत्रों पर आधारित।
- 3चार शाखाएँ: आत्रेय, काश्यपीय, मारीच, भार्गव।
- 4पूजा विधि: वैदिक यज्ञ-प्रधान। अग्निहोत्र और वैदिक कर्मकांड का कठोर पालन। मूर्ति को प्रत्यक्ष ब्रह्म मानकर पूजा।
- 5अधिकार: जन्म से ही वैखानस ब्राह्मण को पूजा का अधिकार (दीक्षा की आवश्यकता नहीं)।
- 6प्रसिद्ध मंदिर: तिरुमला वेंकटेश्वर (तिरुपति) — वैखानस पद्धति से संचालित।
पांचरात्र पद्धति
- 1उत्पत्ति: भगवान नारायण से प्रकट। 'पांचरात्र' = पाँच रात्रियों तक दिया गया ज्ञान।
- 2प्रकृति: आगमिक (तांत्रिक-आगम) परम्परा। वैदिक + आगमिक मंत्रों का मिश्रण।
- 3प्रमुख संहिताएँ: सात्वत, पौष्कर, जयाख्य संहिता आदि 108 संहिताएँ।
- 4पूजा विधि: मंत्र, न्यास, मुद्रा प्रधान। पंचसंस्कार (दीक्षा) अनिवार्य। षोडशोपचार पूजन विस्तृत।
- 5अधिकार: पंचसंस्कार दीक्षा के बाद ही पूजा का अधिकार। जाति से स्वतः नहीं मिलता।
- 6प्रसिद्ध मंदिर: श्रीरंगम, काँचीपुरम — पांचरात्र पद्धति।
प्रमुख अंतर सारणी
- ▸स्रोत: वैखानस = वैदिक; पांचरात्र = आगमिक।
- ▸मंत्र: वैखानस = शुद्ध वैदिक; पांचरात्र = वैदिक + आगमिक + बीज मंत्र।
- ▸दीक्षा: वैखानस = जन्म से; पांचरात्र = पंचसंस्कार दीक्षा आवश्यक।
- ▸यज्ञ: वैखानस = यज्ञ अनिवार्य; पांचरात्र = मंत्र-न्यास प्रधान।
विशेष: रामानुजाचार्य के बाद पांचरात्र पद्धति अधिक प्रचलित हुई, जबकि वैखानस का प्रभाव कम होता गया। दोनों में परस्पर विवाद भी रहा है, किन्तु दोनों ही प्रामाणिक वैष्णव पूजा पद्धतियाँ हैं।





