विस्तृत उत्तर
आगमिक और वैदिक पूजा पद्धति सनातन धर्म के दो महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। 'निगम' (वेद) और 'आगम' (तंत्र) दोनों स्वतंत्र किन्तु परस्पर पोषक हैं।
मूल भेद
1स्रोत
- ▸वैदिक: वेद (ऋक्, यजुः, साम, अथर्व) — अपौरुषेय (ईश्वर प्रेरित)।
- ▸आगमिक: आगम/तंत्र ग्रंथ — शिव द्वारा पार्वती को दिया गया उपदेश (शैव आगम), विष्णु द्वारा (पाञ्चरात्र/वैखानस आगम), देवी द्वारा (शाक्त आगम)।
2पूजा पद्धति
- ▸वैदिक: यज्ञ/होम प्रधान। अग्नि में आहुति, वैदिक ऋचाओं का विशिष्ट स्वर में पाठ।
- ▸आगमिक: मन्दिर पूजा प्रधान। देवता विग्रह में प्राण प्रतिष्ठा, दैनिक पूजा (नित्यपूजा), उत्सव पूजा। विस्तृत अनुष्ठान — अभिषेक, अलंकार, नैवेद्य, दीपाराधना।
3केन्द्र बिन्दु
- ▸वैदिक: यज्ञकुण्ड/अग्नि केन्द्र में।
- ▸आगमिक: देवालय (मन्दिर) और विग्रह (मूर्ति) केन्द्र में। मन्दिर निर्माण, शिल्प, वास्तु सब आगम से नियंत्रित।
4आगम के सात लक्षण (वाराही तंत्र)
सृष्टि, प्रलय, देवतार्चन, सर्वसाधन, पुरश्चरण, षट्कर्म साधन, और ध्यानयोग।
5आगम के तीन प्रकार
- ▸शैव आगम: शिव उपासना (पाशुपत, शैवसिद्धान्त, त्रिक/कश्मीर शैव)।
- ▸वैष्णव आगम: विष्णु उपासना (पाञ्चरात्र, वैखानस)।
- ▸शाक्त आगम: देवी उपासना (कौलाचार, श्रीविद्या आदि)।
6कलियुग में विशेष महत्व
महानिर्वाण तंत्र के अनुसार — 'कलौ आगमसम्मतः' — कलियुग में आगम पद्धति विशेष उपयोगी और लाभदायक है।
7मंत्र
- ▸वैदिक: वैदिक सूक्त और मंत्र (स्वर-प्रधान)।
- ▸आगमिक: बीज मंत्र, तांत्रिक मंत्र, यन्त्र, मुद्रा, न्यास — ये सब आगम की विशेषता।
सम्बन्ध
दोनों परस्पर विरोधी नहीं हैं। वेद 'क्या करना है' (कर्म, ज्ञान, उपासना) बताते हैं, आगम 'कैसे करना है' (साधन, विधि, क्रिया) बताते हैं। अनेक आगम वेदमूलक ही हैं। आज के अधिकांश बड़े मन्दिरों में आगमिक पद्धति से पूजा होती है, जबकि यज्ञ/संस्कार में वैदिक मंत्र प्रयुक्त होते हैं।





