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अभिषेक द्रव्य और फल प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

अभिषेक द्रव्य और फल से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

गंगाजल से अभिषेक करने से क्या होता है?

गंगाजल से अभिषेक: जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और जीव को कैवल्य (मोक्ष) प्राप्त होता है। गंगा = शिव की जटाओं में निवास करने वाली। प्रायः अभिषेक के अंत में गंगाजल चढ़ाते हैं।

गंगाजल अभिषेकजन्म जन्मांतर पापकैवल्य मोक्ष
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पंचामृत अभिषेक क्या होता है और इससे क्या मिलता है?

पंचामृत = दूध + दही + घी + शहद + शर्करा। सभी मनोकामनाओं की पूर्णता और सर्वांगीण समृद्धि। यह पांचों सात्विक द्रव्यों का सम्मिश्रण होने से सबसे सम्पूर्ण अभिषेक है।

पंचामृत अभिषेकदूध दही घी शहद शर्करासर्व मनोकामना
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शिव को शहद चढ़ाने से क्या फायदा होता है?

शहद (मधु) से अभिषेक: दरिद्रता का नाश, प्रचुर धन प्राप्ति, यक्ष्मारोग (टीबी) से मुक्ति और वित्तीय समस्याओं का निवारण।

शहद अभिषेक फलदरिद्रता नाशधन प्रदान
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शिव को दूध चढ़ाने से क्या मिलता है?

कच्चे गाय के दूध से अभिषेक: पुत्र-रत्न की प्राप्ति, आयु वृद्धि, और प्रमेह (मधुमेह) जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति।

दूध अभिषेक फलपुत्र प्राप्तिआयु वृद्धि
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शिवलिंग पर जल चढ़ाने से क्या फायदा होता है?

शुद्ध जल से अभिषेक = सुवृष्टि (वर्षा)। कुशोदक (कुशा मिश्रित जल) से अभिषेक = सभी प्रकार की व्याधियों (रोगों), ज्वर और शारीरिक ताप की शांति।

जल अभिषेक फलकुशोदकवर्षा
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अभिषेक द्रव्य और फल — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर अभिषेक द्रव्य और फल श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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अभिषेक द्रव्य और फल को गहराई से समझने का तरीका

अभिषेक द्रव्य और फल प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।