ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

शिव पुराण प्रश्नोत्तर — 2 प्रश्न

शिव पुराण से जुड़े 2 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 2 प्रश्न

शिव पुराण सुनने से क्या पाप नष्ट होते हैं?

शिव पुराण = वेदतुल्य। श्रवण से: जन्मांतर के संचित पाप, महापाप (ब्रह्महत्या आदि), पितृ दोष — सब क्षीण। चंचुला कथा: पतिता स्त्री ने कथा सुनकर स्वयं और पति दोनों को मोक्ष दिलाया। नियम: श्रद्धापूर्वक, सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, भूखे न सुनें। पूर्ण होने पर दान-भोजन करवाएं।

शिव पुराणपाप नाशकथा श्रवण
पूरा उत्तर पढ़ें →

शिव पुराण में कितने संहिताएं हैं और प्रत्येक का विषय क्या है?

प्रचलित शिव पुराण: 7 संहिताएं। (1) विद्येश्वर — ओंकार, शिवलिंग, रुद्राक्ष। (2) रुद्र — सती, पार्वती विवाह, गणेश-कार्तिकेय जन्म। (3) शतरुद्र — शिव अवतार। (4) कोटिरुद्र — 12 ज्योतिर्लिंग। (5) उमा — स्त्री धर्म, पाप-पुण्य। (6) कैलास — मोक्ष, दर्शन। (7) वायवीय — पाशुपत विज्ञान, योग। मूलतः 12 संहिताएं, 1 लाख श्लोक; व्यास ने 24,000 में संक्षिप्त किया।

शिव पुराणसंहितापुराण संरचना
पूरा उत्तर पढ़ें →

शिव पुराण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव पुराण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

शिव पुराण को गहराई से समझने का तरीका

शिव पुराण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

2 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।