विस्तृत उत्तर
शिव पुराण की संरचना के बारे में दो मत प्रचलित हैं:
मूल शिव पुराण: मूल रूप में 12 संहिताएं और एक लाख श्लोक थे। व्यास जी ने इसे 24,000 श्लोकों में संक्षिप्त किया।
वर्तमान प्रचलित शिव पुराण (गीता प्रेस संस्करण): 7 संहिताएं
1विद्येश्वर संहिता
विषय: ओंकार का महत्व, शिवलिंग पूजा विधि, शिव भस्म, रुद्राक्ष का माहात्म्य, दान का महत्व। शिव पूजा के मूलभूत सिद्धांत।
2रुद्र संहिता (4 खंड — सृष्टि, सती, पार्वती, कुमार)
विषय: शिव को आदि शक्ति का कारण बताया गया। सती कथा, दक्ष यज्ञ विध्वंस, पार्वती तप और विवाह, कार्तिकेय जन्म, गणेश उत्पत्ति, पृथ्वी परिक्रमा कथा। शिव पूजा विधि।
3शतरुद्र संहिता
विषय: शिव के अवतारों का वर्णन, शिव की लीलाएं, भक्तों की कथाएं।
4कोटिरुद्र संहिता
विषय: द्वादश ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत वर्णन, उनकी स्थापना कथाएं और माहात्म्य।
5उमा संहिता
विषय: उमा (पार्वती) का माहात्म्य, स्त्री धर्म, नरक-स्वर्ग वर्णन, पाप-पुण्य विवेचन, शिव भक्ति की महिमा।
6कैलास संहिता
विषय: शिव तत्व का दार्शनिक विवेचन, मोक्ष मार्ग, ज्ञान-विज्ञान, शिव ध्यान की उच्च विधियां।
7वायवीय संहिता (दो भाग — पूर्व और उत्तर)
विषय: पाशुपत विज्ञान, मोक्ष के लिए शिव ज्ञान की प्रधानता, हवन, योग, शिव ध्यान, निर्गुण-सगुण शिव विवेचन। शिव ही चराचर जगत के एकमात्र देवता हैं।
मूल 12 संहिताओं के नाम (प्राचीन विभाजन)
विद्येश्वर, रुद्र, विनायक, उमा, सहस्रकोटिरुद्र, एकादशरुद्र, कैलास, शतरुद्र, कोटिरुद्र, मातृ, वायवीय, धर्म।



