विस्तृत उत्तर
वाल्मीकि रामायण (आदि काव्य) में 7 कांड, लगभग 24,000 श्लोक (इसीलिए इसे 'चतुर्विंशति सहस्री संहिता' भी कहते हैं) और लगभग 500 सर्ग हैं।
7 कांड और उनके विषय
- 1बालकांड (77 सर्ग):
- ▸विषय: राम जन्म, बाल लीला, विश्वामित्र के साथ गमन, ताड़का वध, अहल्या उद्धार, शिव धनुष भंग, सीता स्वयंवर, परशुराम प्रसंग।
- ▸सार: राम का अवतरण और बाल्यकाल।
- 1अयोध्याकांड (119 सर्ग):
- ▸विषय: राम राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी का वर, 14 वर्ष वनवास, दशरथ मृत्यु, भरत का चित्रकूट गमन, पादुका पूजन।
- ▸सार: त्याग, कर्तव्य, पितृभक्ति।
- 1अरण्यकांड (75 सर्ग):
- ▸विषय: दण्डकारण्य वनवास, शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, मारीच-स्वर्ण मृग, सीता हरण, जटायु युद्ध, शबरी भेंट।
- ▸सार: वन जीवन और सीता हरण की त्रासदी।
- 1किष्किंधाकांड (67 सर्ग):
- ▸विषय: हनुमान से भेंट, सुग्रीव मैत्री, बालि वध, सुग्रीव राज्याभिषेक, सीता खोज का संकल्प, वानर सेना का प्रस्थान।
- ▸सार: मित्रता और खोज।
- 1सुंदरकांड (68 सर्ग):
- ▸विषय: हनुमान का समुद्र लंघन, लंका में सीता खोज, अशोक वाटिका में सीता दर्शन, लंका दहन, वापसी।
- ▸सार: हनुमान की भक्ति, वीरता और कूटनीति। सबसे शुभ कांड।
- 1युद्धकांड/लंकाकांड (128 सर्ग):
- ▸विषय: सेतु निर्माण, लंका युद्ध, कुंभकर्ण-इंद्रजीत-रावण वध, सीता अग्नि परीक्षा, अयोध्या वापसी, राज्याभिषेक।
- ▸सार: धर्म की अधर्म पर विजय। सबसे बड़ा कांड।
- 1उत्तरकांड (111 सर्ग):
- ▸विषय: राम राज्य, सीता निर्वासन, लव-कुश जन्म, सीता पृथ्वी प्रवेश, राम का जल समाधि।
- ▸सार: राजधर्म और कठिन निर्णय।
ध्यान दें: उत्तरकांड की प्रामाणिकता पर विद्वानों में मतभेद है। कई विद्वान इसे बाद का प्रक्षेप (interpolation) मानते हैं।





