विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में 35 अध्याय हैं और इनमें अनेक विषयों का समावेश है।
मृत्यु का स्वरूप — मरणासन्न व्यक्ति की अवस्था, आत्मा के निकलने का क्रम, यमदूतों का आना।
यमलोक और यममार्ग — यममार्ग के कष्ट, वैतरणी नदी, 16 पड़ाव, धर्मराज का दरबार, चित्रगुप्त का लेखा।
नरक वर्णन — 21 से 36 प्रकार के नरकों का वर्णन, पाप और उनके दंड का विवरण।
प्रेत-योनि — प्रेत क्यों बनता है, प्रेत के कष्ट, प्रेत-मुक्ति के उपाय।
दान महिमा — अष्टमहादान, गोदान, भूमिदान का विवरण, दान का फल।
कर्मकांड — दशगात्र, एकादशाह, षोडश श्राद्ध, सपिंडीकरण, वृषोत्सर्ग।
श्राद्ध विधि — श्राद्ध के प्रकार, विधि, पात्र, समय।
कथाएँ — बभ्रुवाहन कथा जैसी उपदेशात्मक कथाएँ।
मोक्ष के उपाय — भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार और परमात्मा-शरण।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'इन अध्यायों में मृत्यु का स्वरूप, मरणासन्न व्यक्ति की अवस्था, तथा उनके कल्याण के लिए अंतिम समय में किए जाने वाले क्रिया-कृत्य का विधान है।'





