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मकर संक्रांति परिचय प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

मकर संक्रांति परिचय से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

मकर संक्रांति पर किए कार्यों का फल कितना गुना मिलता है?

धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा। राजमार्तंड: अयन/विषुव संक्रांति पर दान = सामान्य दिनों से करोड़ों गुना (कोटिगुना) पुण्य। दान भविष्य के जन्मों में सूर्य देव द्वारा लौटाया जाता है।

फल गुनादान पुण्यराजमार्तंड
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मकर संक्रांति की तारीख सौर कैलेंडर पर क्यों है?

भारतीय पंचांग चंद्र-आधारित है, पर मकर संक्रांति पूर्णतः सौर-वर्ष पर आधारित है। कारण: यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (खगोलीय घटना) पर निर्भर है — चंद्रमा पर नहीं। इसीलिए हर साल लगभग 14-15 जनवरी को पड़ती है।

सौर कैलेंडरचंद्र पंचांग14 जनवरी
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उत्तरायण क्या होता है — देवयान क्यों कहते हैं?

उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। दक्षिणायन = 'पितृयान'। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन — पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का पर्व।

उत्तरायणदेवयानदक्षिणायन
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मकर संक्रांति का खगोलीय महत्व क्या है?

मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण — उत्तरायण (Winter Solstice के निकट) का आरंभ। भारतीय पंचांग चंद्र-आधारित है, पर मकर संक्रांति पूर्णतः सौर-वर्ष (Solar Calendar) पर आधारित है। यह नव-चेतना, स्फूर्ति और स्वास्थ्य का संचार करती है।

खगोलीय महत्वसौर वर्षराशि परिवर्तन
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मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण। उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता की ओर। धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण आदि: इस दिन स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा।

मकर संक्रांतिसूर्य संक्रमणउत्तरायण
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मकर संक्रांति परिचय — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर मकर संक्रांति परिचय श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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मकर संक्रांति परिचय को गहराई से समझने का तरीका

मकर संक्रांति परिचय प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।