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स्तोत्र प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

स्तोत्र से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

कालभैरव अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

शंकराचार्य रचित। कब: कालाष्टमी (कृष्ण अष्टमी), भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष), शनिवार/मंगलवार, रात्रि। उद्देश्य: भय नाश (काल=मृत्यु भय), शत्रु नाश, समय अधिपति, काशी मोक्ष। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।

कालभैरवअष्टकमशंकराचार्य
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दुर्गा सप्तशती का सिद्ध कुंजिका मंत्र

सिद्ध कुंजिका मंत्र ('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं... ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा') एक ऐसा गुप्त बीज मंत्र है, जिसके पाठ मात्र से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का फल मिलता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

सिद्ध कुंजिकादुर्गा सप्तशतीसिद्धि
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लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री सूक्त के मंत्र

ऋग्वेद के 'श्री सूक्त' का प्रथम मंत्र ('ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं...') माता लक्ष्मी के स्वर्णिम स्वरूप का आवाहन है। श्री यंत्र पर इसका नियमित पाठ दरिद्रता को पूर्णतः नष्ट कर देता है।

श्री सूक्तमहालक्ष्मीधन प्राप्ति
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शरीर की रक्षा के लिए 'वज्र पंजर कवच' मंत्र

वज्र पंजर का अर्थ है 'वज्र का पिंजरा'। शनि या दुर्गा वज्र पंजर कवच का पाठ शरीर के प्रत्येक अंग के चारों ओर एक अभेद्य ऊर्जा-घेरा बना देता है, जो काले जादू, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु से रक्षा करता है।

वज्र पंजरकवचसुरक्षा
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राम रक्षा स्तोत्र कितनी बार पढ़ें

सामान्य सुरक्षा के लिए प्रतिदिन एक बार पाठ पर्याप्त है। गंभीर संकट निवारण या सिद्धि के लिए 41 दिनों तक 11 बार या नवरात्रि में 108 बार इसका पाठ करना चाहिए।

राम रक्षास्तोत्र पाठसुरक्षा कवच
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ललिता सहस्रनाम पाठ के फायदे

ललिता सहस्रनाम का नियमित पाठ असाध्य रोगों को दूर करता है, घर से दरिद्रता और वास्तु दोषों को नष्ट करता है, तथा जीवन में सुख, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति कराता है।

ललिता सहस्रनामश्री विद्यासौभाग्य
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शांति पाठ मंत्र का वास्तविक अर्थ

शांति पाठ केवल व्यक्तिगत शांति नहीं, बल्कि स्वर्ग, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, वनस्पति और संपूर्ण ब्रह्मांड में शांति और संतुलन स्थापित करने की एक वैदिक प्रार्थना है।

शांति पाठयजुर्वेदप्रकृति
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विष्णु सहस्रनाम के सिद्ध मंत्र

समय के अभाव में 'श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥' का तीन बार पाठ करने से पूरे विष्णु सहस्रनाम का पुण्य प्राप्त होता है।

विष्णु सहस्रनामसिद्ध श्लोकश्री राम
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किस परिस्थिति में करना चाहिए?

वाल्मीकि रामायण युद्ध काण्ड सर्ग 105: अगस्त्य→राम (थके+चिंतित) → तीन बार जप → रावण वध। परिस्थिति: विजय/सफलता, संकट/कष्ट, निराशा/थकान, सूर्य ग्रह शांति, नेत्र/हृदय रोग। सूर्योदय, 3 बार, रविवार। बिना दीक्षा सभी। 30 श्लोक।

आदित्य हृदयसूर्यविजय
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रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से क्या सुरक्षा मिलती है?

बुधकौशिक ऋषि रचित। सुरक्षा: शरीर प्रत्येक अंग रक्षा (कवच), भय/शत्रु/दुर्घटना/रोग/नकारात्मकता से। यात्रा पूर्व विशेष। 'रामो राजमणिः सदा विजयते।' प्रातः/सायं, 10-15 मिनट। बिना दीक्षा सब पढ़ सकते। 'पापघ्नीं सर्वकामदाम्'।

रामरक्षासुरक्षाकवच
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स्तोत्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर स्तोत्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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स्तोत्र को गहराई से समझने का तरीका

स्तोत्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।