विस्तृत उत्तर
श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत लंबा और जटिल है, जिसे समय अभाव के कारण हर व्यक्ति नहीं कर पाता। भगवान शिव ने माता पार्वती को 'सिद्ध कुंजिका स्तोत्र' के रूप में एक ऐसा गुप्त मंत्र बताया है, जिसके केवल पाठ मात्र से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती पढ़ने का फल प्राप्त हो जाता है। 'कुंजिका' का अर्थ है चाबी (Key), जो सप्तशती के गुप्त शक्तियों के ताले को खोल देती है।
इसका सिद्ध और सबसे जाग्रत महामंत्र है—'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥' यह मंत्र बीज अक्षरों का प्रचंड समूह है। इसका नियमित पाठ करने से मारण, मोहन, वशीकरण, स्तंभन और उच्चाटन जैसी सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं और अकारण आ रही भयंकर विपत्तियां टल जाती हैं।





