विस्तृत उत्तर
श्री दुर्गा सप्तशती अपने आप में एक अत्यंत शक्तिशाली ग्रंथ है। किसी विशेष और शीघ्र मनोकामना की पूर्ति के लिए इसके पाठ को 'संपुटित' करने का विधान है।
संपुट का अर्थ — संपुट का अर्थ है सप्तशती के प्रत्येक श्लोक या अध्याय के प्रारंभ और अंत में किसी विशेष सिद्ध मंत्र का उच्चारण करना। सबसे अधिक नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का संपुट लगाया जाता है।
विशिष्ट उद्देश्यों के लिए — भिन्न-भिन्न इच्छाओं के लिए अलग-अलग संपुट होते हैं। विपत्ति और महामारी नाश के लिए 'शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे...' का संपुट लगता है, जबकि आकर्षण के लिए 'ज्ञानिनामपि चेतांसि...' का प्रयोग होता है।
सावधानी — संपुट पाठ सामान्य पाठ से कई गुना अधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है, इसलिए इसे पूर्ण शुद्धता, ब्रह्मचर्य और कठोर नियमों के साथ ही किया जाना चाहिए।



