मंत्र साधनादुर्गा सप्तशती के निर्वाण मंत्र की साधनायह 'नवार्ण' (9 अक्षरों का) मंत्र है: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। इसमें सरस्वती, लक्ष्मी और काली तीनों की शक्ति है। इसका जप जीवन के सभी दुःखों और शत्रुओं का पूर्ण नाश करता है।#नवार्ण मंत्र#दुर्गा#मार्कंडेय पुराण
मंत्र साधनादुर्गा सप्तशती के संपुट मंत्रविशेष इच्छा पूर्ति हेतु सप्तशती के हर श्लोक के आगे-पीछे विशिष्ट मंत्र (जैसे नवार्ण मंत्र) जोड़ना संपुट कहलाता है। यह पाठ को अचूक और अत्यंत शक्तिशाली बना देता है।#दुर्गा सप्तशती#संपुट विधि
मंत्र और स्तोत्रदुर्गाष्टमी पूजा में नर्वाण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं) जपने का क्या विधान है?दुर्गाष्टमी पर 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (नर्वाण मंत्र) की कम से कम एक माला (108 बार) जाप करनी चाहिए। इसमें सरस्वती, लक्ष्मी और काली माता के बीज मंत्र शामिल हैं।#नर्वाण मंत्र#बीज मंत्र#शक्ति साधना
तंत्र साधनातंत्र में लता साधना क्या होती है?लता साधना: 'लता' = शक्ति/स्त्री तत्व। कौल/वामाचार की गोपनीय साधना — शक्ति-सहचर में काम-ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन। दो स्तर: प्रतीकात्मक (दक्षिणाचार) और यथार्थ (वामाचार)। केवल गुरु-दीक्षित वीराचार साधक ही अधिकारी। बिना गुरु = पतन। कलियुग में मानसिक रूप ही उचित।#लता साधना#वामाचार#पंचमकार
तंत्र साधनातंत्र में भैरवी का क्या अर्थ है?भैरवी के अर्थ: (1) भय-नाशिनी देवी, (2) दशमहाविद्या में त्रिपुर भैरवी, (3) दीक्षित तांत्रिक स्त्री, (4) शिव-पार्वती संवाद में पार्वती का सम्बोधन, (5) भैरवी चक्र साधना पद्धति, (6) विज्ञान भैरव तंत्र की देवी। उच्चकोटि की गुरु-निर्देशित साधना।#भैरवी#त्रिपुर भैरवी#दशमहाविद्या