विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि धर्म सिंधु और नित्यकर्म पूजा प्रकाश में वर्णित है:
पाठ से पूर्व तैयारी
- 1स्नान, स्वच्छ लाल या पीत वस्त्र
- 2पूर्व या उत्तर मुख बैठें
- 3लाल आसन
- 4सामने देवी का चित्र या मूर्ति
- 5धूप, दीप, पुष्प, जल
पाठ का क्रम — षडंग पाठ (पूर्ण विधि)
1प्रारंभिक मंत्र — देव्यथर्वशीर्ष
> 'ॐ अस्य श्रीचण्डीमाहात्म्यस्य...'
2कवच
पाठ से पहले देवी कवच पढ़ें — यह साधक की रक्षा करता है।
3अर्गला स्तोत्र
> 'जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी...'
— यह पाठ का द्वार खोलता है।
4कीलक स्तोत्र
पाठ के रहस्य को 'कील' (खूँटी) से मुक्त करता है।
5नवार्ण मंत्र
> 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'
— 108 बार जप करें। यह सप्तशती का बीज मंत्र है।
6तीन चरित्र — 13 अध्याय
| चरित्र | अध्याय | देवता | असुर |
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| प्रथम चरित्र | 1 | महाकाली | मधु-कैटभ |
| मध्यम चरित्र | 2, 3, 4 | महालक्ष्मी | महिषासुर |
| उत्तम चरित्र | 5-13 | महासरस्वती | शुंभ-निशुंभ |
7अंतिम विधि
- ▸उपसंहार श्लोक
- ▸आरती
- ▸क्षमा प्रार्थना
पाठ के विभिन्न प्रकार
| पाठ | विधि | अवधि |
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| एक दिन | सम्पूर्ण 13 अध्याय | 3-4 घंटे |
| नौ दिन | प्रत्येक दिन 1-2 अध्याय | नवरात्रि |
| सप्तशती यज्ञ | पाठ + हवन | 3-7 दिन |
नवरात्रि में पाठ वितरण
- ▸दिन 1: कवच + अर्गला + कीलक + अध्याय 1
- ▸दिन 2: अध्याय 2-3
- ▸दिन 3: अध्याय 4
- ▸दिन 4: अध्याय 5-6
- ▸दिन 5: अध्याय 7
- ▸दिन 6: अध्याय 8-9
- ▸दिन 7: अध्याय 10-11
- ▸दिन 8: अध्याय 12-13
- ▸दिन 9: उपसंहार + हवन





