विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के शुभ समयों का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और कालिका पुराण में विस्तार से मिलता है:
दैनिक शुभ काल
- 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे):
सात्विक तंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ। गायत्री, लक्ष्मी, सरस्वती, विष्णु साधना।
- 1प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद):
शिव-शक्ति साधना के लिए उत्तम।
- 1निशीथ काल (मध्यरात्रि — रात 11:30 से 12:30):
तांत्रिक साधना के लिए सर्वोत्तम। काली, भैरव, दस महाविद्या साधना।
> महानिर्वाण तंत्र: 'निशीथे च महाशक्तिः पूजयेद् भक्तिमान् नरः।'
- 1चतुर्थ प्रहर (प्रातः 3-6 बजे):
देवताओं का जागृत काल — साधना के लिए अत्यंत शुभ।
मासिक विशेष तिथियाँ
| तिथि | साधना | देवता |
|------|--------|--------|
| अमावस्या | सर्वोत्तम तांत्रिक साधना | काली, भैरव |
| पूर्णिमा | सात्विक साधना | लक्ष्मी, त्रिपुरसुंदरी |
| कृष्ण अष्टमी | देवी साधना | काली, चामुंडा |
| शुक्ल अष्टमी | शक्ति साधना | दुर्गा |
| प्रदोष (त्रयोदशी) | शिव-शक्ति | शिव, काली |
| चतुर्थी | गणेश तंत्र | गणपति |
वार्षिक विशेष काल
- 1नवरात्रि (शारदीय और चैत्र):
तंत्र साधना का महाकाल। दस महाविद्याओं की साधना के लिए सर्वोत्तम।
- 1दीपावली (काली पूजा):
काली और महाकाली तंत्र साधना के लिए वर्ष का सर्वोत्तम अवसर।
- 1महाशिवरात्रि:
शिव-शक्ति तंत्र साधना के लिए।
- 1ग्रहण काल (सूर्य/चंद्र ग्रहण):
ग्रहण काल में तंत्र साधना अत्यंत शीघ्र फलदायी होती है — किंतु सामान्य जन इस काल में पूजा न करें; यह केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए है।
- 1ज्येष्ठ अमावस्या (फलहारिणी काली पूजा):
काली साधना के लिए विशेष।
वर्जित समय
- ▸सूतक-पातक में साधना न करें
- ▸श्राद्ध पक्ष में उच्च तंत्र साधना न करें
- ▸अत्यंत बीमारी, शोक और मानसिक अस्थिरता में साधना बंद रखें





