विस्तृत उत्तर
लक्ष्मी मंत्र जप के शुभ समय का वर्णन तंत्र शास्त्र और स्कंद पुराण में विस्तार से मिलता है:
दैनिक श्रेष्ठ समय
- 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे):
सर्वश्रेष्ठ — इस समय मन शांत और वातावरण सात्विक होता है। श्री सूक्त और लक्ष्मी मंत्र का पाठ अत्यंत फलदायी।
- 1प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद — संध्या 5-7 बजे):
विशेष शुभ — इस समय लक्ष्मी जी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं (स्कंद पुराण)। संध्या दीप जलाकर मंत्र जप करें।
- 1मध्यान्ह (दोपहर 12 बजे):
स्नान और पूजन के बाद दोपहर का जप भी शुभ।
साप्ताहिक विशेष दिन
- 1शुक्रवार — सर्वोत्तम:
- ▸शुक्र ग्रह = लक्ष्मी ग्रह
- ▸शुक्रवार को किया गया जप सप्ताह के अन्य दिनों की अपेक्षा सात गुना अधिक फलदायी
- ▸शुक्रवार प्रदोष काल में 1008 जप विशेष
- 1पूर्णिमा:
चंद्रमा = समृद्धि और पूर्णता — पूर्णिमा को श्री सूक्त पाठ और मंत्र जप अत्यंत शुभ।
- 1गुरुवार:
बृहस्पति (गुरु) लक्ष्मी का सहयोगी ग्रह — गुरुवार को लक्ष्मी-विष्णु पूजन।
वार्षिक विशेष समय
- 1दीपावली (अमावस्या रात्रि): वर्ष का सर्वोत्तम — प्रदोष स्थिर लग्न में
- 2नवरात्रि: लक्ष्मी साधना का विशेष काल
- 3अक्षय तृतीया: धन वृद्धि के लिए श्रेष्ठ
- 4धनतेरस: धनवंतरि पूजन + लक्ष्मी स्मरण
- 5शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा): लक्ष्मी जी रात भर भ्रमण करती हैं — जागरण और पूजन
जप की अवधि
- ▸नित्य: 15-20 मिनट (108 बार)
- ▸शुक्रवार: 45-60 मिनट (1008 बार)
- ▸विशेष अनुष्ठान: पूर्ण संध्या (3-4 घंटे)
वर्जित समय
- ▸सूतक-पातक में जप न करें (या मानसिक जप करें)
- ▸भोजन के तुरंत बाद न करें
- ▸अत्यंत क्रोधित मन से जप न करें





