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साधना समय📜 महानिर्वाण तंत्र, शाक्त आगम — साधना काल2 मिनट पठन

तंत्र साधना के लिए कौन सा समय सही है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र साधना का श्रेष्ठ समय: रात्रि के तृतीय प्रहर (निशीथ — केवल दीक्षित), ब्रह्ममुहूर्त (भक्ति साधना — सबके लिए), प्रदोष। अमावस्या की रात और शारद नवरात्रि — वार्षिक महाकाल। सामान्य साधक ब्रह्ममुहूर्त चुनें।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना के उपयुक्त समय का वर्णन महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से है:

चतुर्यामी साधना — महानिर्वाण तंत्र

तंत्र में रात्रि के चार प्रहरों में साधना का विशेष विधान है:

| प्रहर | समय | साधना |

|-------|-----|--------|

| प्रथम | शाम 6-9 | भक्ति पूजा — सबके लिए |

| द्वितीय | रात 9-12 | उपासना — दीक्षित साधक |

| तृतीय (निशीथ) | रात 12-3 | तांत्रिक साधना — अनुभवी |

| चतुर्थ | रात 3-6 (ब्रह्ममुहूर्त) | ध्यान — सभी साधक |

सर्वोत्तम तांत्रिक काल

  1. 1अमावस्या की रात — सर्वोत्तम
  2. 2शारद नवरात्रि — 9 दिन का महाकाल
  3. 3कालाष्टमी रात — मासिक
  4. 4ग्रहण काल — कुछ परंपराओं में; किंतु नई साधना न आरंभ करें

दैनिक उत्तम समय

  • ब्रह्ममुहूर्त — सात्विक साधना
  • प्रदोष — शिव-शाक्त पूजा
  • निशीथ — केवल दीक्षित

ऋतु के अनुसार

  • शरद ऋतु — शाक्त साधना के लिए सर्वोत्तम
  • वसंत — सौम्य साधना
  • श्रावण मास — शिव-शाक्त दोनों

सामान्य साधकों के लिए सर्वोत्तम

ब्रह्ममुहूर्त और प्रदोष — ये दोनों समय सुरक्षित, शुभ और प्रभावशाली हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
महानिर्वाण तंत्र, शाक्त आगम — साधना काल
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