विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के उपयुक्त समय का वर्णन महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से है:
चतुर्यामी साधना — महानिर्वाण तंत्र
तंत्र में रात्रि के चार प्रहरों में साधना का विशेष विधान है:
| प्रहर | समय | साधना |
|-------|-----|--------|
| प्रथम | शाम 6-9 | भक्ति पूजा — सबके लिए |
| द्वितीय | रात 9-12 | उपासना — दीक्षित साधक |
| तृतीय (निशीथ) | रात 12-3 | तांत्रिक साधना — अनुभवी |
| चतुर्थ | रात 3-6 (ब्रह्ममुहूर्त) | ध्यान — सभी साधक |
सर्वोत्तम तांत्रिक काल
- 1अमावस्या की रात — सर्वोत्तम
- 2शारद नवरात्रि — 9 दिन का महाकाल
- 3कालाष्टमी रात — मासिक
- 4ग्रहण काल — कुछ परंपराओं में; किंतु नई साधना न आरंभ करें
दैनिक उत्तम समय
- ▸ब्रह्ममुहूर्त — सात्विक साधना
- ▸प्रदोष — शिव-शाक्त पूजा
- ▸निशीथ — केवल दीक्षित
ऋतु के अनुसार
- ▸शरद ऋतु — शाक्त साधना के लिए सर्वोत्तम
- ▸वसंत — सौम्य साधना
- ▸श्रावण मास — शिव-शाक्त दोनों
सामान्य साधकों के लिए सर्वोत्तम
ब्रह्ममुहूर्त और प्रदोष — ये दोनों समय सुरक्षित, शुभ और प्रभावशाली हैं।





