विस्तृत उत्तर
काली साधना के शुभ समय का वर्णन महाकाल संहिता और कालिका पुराण में विस्तार से मिलता है:
दैनिक शुभ समय
- 1अर्धरात्रि (रात 12 बजे — निशीथ काल):
सर्वश्रेष्ठ — यह काली माँ का प्रिय काल है
> 'निशीथे च महाकाली पूजयेद् भक्तिमान् नरः' (कालिका पुराण)
- 1प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद):
रात्रि प्रारंभ — शुभ
- 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे):
भक्ति मार्ग के साधकों के लिए
मासिक शुभ तिथियां
- 1अमावस्या (प्रत्येक माह):
सर्वोत्तम — काली साधना की प्रमुख तिथि है
अमावस्या की रात 12 बजे साधना का विशेष महत्व
- 1कृष्ण पक्ष की अष्टमी (मासिक कालाष्टमी):
प्रतिमाह की कालाष्टमी काली माँ की विशेष तिथि है
- 1कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी:
शिव-शक्ति की संयुक्त पूजा के लिए
वार्षिक विशेष अवसर
- 1दीपावली की रात (काली पूजा):
वर्ष का सर्वोत्तम काल — विशेषकर बंगाल, उड़ीसा में 'श्यामा पूजा'
- 1नवरात्रि सप्तमी-अष्टमी (कालरात्रि):
नवदुर्गा की सप्तमी — कालरात्रि का दिन
- 1महाशिवरात्रि:
शिव-काली की संयुक्त साधना के लिए
- 1ज्येष्ठ माह की अमावस्या (फलहारिणी काली पूजा):
बंगाल में यह 'फलहारिणी काली पूजा' के नाम से जानी जाती है — अत्यंत महत्वपूर्ण
विशेष ग्रह योग
- ▸मंगलवार और शनिवार की अमावस्या — विशेष शक्तिशाली
- ▸ग्रहण काल — तांत्रिकों के लिए महत्वपूर्ण (सामान्य जन घर पर रहें)
प्रतिबंधित समय
- ▸सूर्योदय से दोपहर तक — काली की गहरी साधना उचित नहीं
- ▸पूर्णिमा — लक्ष्मी/सरस्वती की पूजा का समय
- ▸सूतक-पातक काल





