विस्तृत उत्तर
दुर्गा पूजा का महत्व हिंदू धर्म में अत्यंत व्यापक और बहुआयामी है:
पौराणिक महत्व
- 1महिषासुर वध: जब महिषासुर के अत्याचार से देवता भी परेशान हो गए, तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की संयुक्त शक्ति से दुर्गा प्रकट हुईं और महिषासुर का वध किया — तभी से दुर्गा पूजा की परंपरा है।
- 1रामायण में: देवी भागवत के अनुसार श्री राम ने लंका पर विजय से पूर्व शरद नवरात्रि में दुर्गा पूजा की थी — इसी से 'अकाल बोधन' की परंपरा बंगाल में है।
- 1दुर्गा सप्तशती का वचन: 'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' — देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं।
आध्यात्मिक महत्व
- 1तमस (आलस्य), रजस (विकार) और अहंकार (महिषासुर) का नाश
- 2सात्विक गुणों का उदय
- 3आंतरिक शक्ति की जागृति
सामाजिक महत्व
- 1स्त्री शक्ति का सम्मान
- 2समाज में एकता और उत्सव का भाव
- 3पर्यावरण जागरूकता (मिट्टी की प्रतिमा, जल विसर्जन)
व्यक्तिगत लाभ (शास्त्रोक्त)
- ▸सभी कष्टों और बाधाओं का निवारण
- ▸शत्रु भय नाश
- ▸रोग, दरिद्रता और दुर्भाग्य से मुक्ति
- ▸संतान प्राप्ति
- ▸मोक्ष का मार्ग
दुर्गा सप्तशती का फल वर्णन
> 'महामायां च सम्पूज्य जप्त्वा सम्यक् पठेद्यदि।
> त्रिभिः शापविनिर्मुक्तः सोऽपि मोक्षमवाप्नुयात्॥'
— जो श्रद्धा से सप्तशती का पाठ करता है, वह सभी शापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।





