विस्तृत उत्तर
शारदीय नवरात्रि (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी) वर्ष की सबसे प्रमुख नवरात्रि है। इसे 'महानवरात्रि' भी कहते हैं। दसवें दिन दशहरा (विजयादशमी) मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि विशेष पूजा
1. कलश स्थापना: प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में। जौ बोएँ, अखण्ड ज्योति।
2. नव दुर्गा पूजन: प्रतिदिन एक-एक देवी — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। प्रत्येक देवी का अलग मंत्र, रंग और भोग।
3. दुर्गा सप्तशती पाठ (सबसे महत्वपूर्ण): 700 श्लोकों का सम्पूर्ण पाठ 9 दिनों में। साथ में देवी कवच, अर्गला, कीलक, सिद्धकुंजिका स्तोत्र।
4. नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — प्रतिदिन 108+ जप।
5. दुर्गाष्टमी (8वाँ दिन): महाष्टमी — हवन, कन्या पूजन (9 कन्या = नव दुर्गा), सन्धि पूजा (अष्टमी-नवमी सन्धिकाल में 108 दीपक)।
6. महानवमी (9वाँ दिन): हवन (पूर्णाहुति), कन्या पूजन, कलश विसर्जन, जवारे विसर्जन।
7. विजयादशमी (दशहरा): शस्त्र पूजा, अपराजिता देवी पूजा, शमी वृक्ष पूजा, रावण दहन (बुराई पर अच्छाई की विजय)।
शारदीय की विशेषता: बंगाल में दुर्गा पूजा (षष्ठी से दशमी) भव्य पण्डालों में। गुजरात में गरबा-डाण्डिया। उत्तर भारत में रामलीला। दक्षिण में सरस्वती-लक्ष्मी पूजा। देश भर में विजयादशमी पर रावण दहन।
व्रत नियम: 9 दिन उपवास (फलाहार/एक समय भोजन)। तामसिक भोजन वर्जित। ब्रह्मचर्य। प्रतिदिन सुबह-शाम आरती।





