विस्तृत उत्तर
गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा) पर चप्पल न पहनने की परम्परा:
- 1गुरु सम्मान: गुरु = ब्रह्म (गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...)। गुरु पूर्णिमा = गुरु चरणों का दिन। नंगे पैर = परम विनम्रता = 'गुरुदेव, मैं आपके चरणों का दास हूँ।'
- 1भूमि = गुरु: इस दिन सम्पूर्ण पृथ्वी = गुरु चरण। चप्पल = चमड़ा/अपवित्र — गुरु चरण रूप भूमि पर = अपमान।
- 1तप = कष्ट स्वीकार: नंगे पैर चलना = छोटा तप। गुरु पूर्णिमा पर यह तप = गुरु को अर्पित। 'गुरु के लिए कष्ट = सेवा।'
- 1Earthing (वैज्ञानिक): नंगे पैर = पृथ्वी से सीधा सम्पर्क = Grounding = ऊर्जा प्राप्ति (पूर्व बैच में विस्तार)।
- 1अहंकार त्याग: जूते-चप्पल = सामाजिक स्थिति/अहंकार। उतारना = अहंकार त्याग = गुरु के समक्ष शून्य।
विशेष: यह कठोर नियम नहीं — कुछ क्षेत्रों/परम्पराओं में। सभी भक्त पालन नहीं करते। भावना महत्वपूर्ण — चप्पल पहनकर भी गुरु भक्ति सम्भव।





