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त्योहार पूजा📜 भागवत पुराण (दशम स्कन्ध), सूरसागर, ब्रजभाषा काव्य1 मिनट पठन

जन्माष्टमी पर दही हांडी की परंपरा का पौराणिक आधार क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

दही हांडी आधार: भागवत दशम स्कन्ध — बालकृष्ण+ग्वाल=गोपियों का माखन चुराना। ऊँची मटकी=गोपी रक्षा, मानव पिरामिड=ग्वाल, शीर्ष=कृष्ण (गोविन्दा)। पुनराभिनय। महाराष्ट्र=भव्य। 'गोविन्दा आला रे!'

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विस्तृत उत्तर

दही हांडी = जन्माष्टमी के अगले दिन (नन्दोत्सव) = बालकृष्ण की माखन चोरी लीला:

पौराणिक आधार (भागवत पुराण दशम स्कन्ध)

गोकुल-वृन्दावन में बालकृष्ण ग्वाल सखाओं के साथ गोपियों का माखन-दही चुराते थे। गोपियाँ माखन ऊँचाई पर (छत से लटकी मटकी) रखती — कृष्ण ग्वालों के कंधों पर चढ़कर हांडी तोड़ते। गोपियाँ यशोदा से शिकायत करतीं — 'मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो' (सूरदास)।

दही हांडी = कृष्ण लीला का पुनराभिनय

  • ऊँचाई पर बँधी मटकी = गोपियों की मटकी।
  • मानव पिरामिड = ग्वाल सखा (एक-दूसरे के कंधों पर)।
  • शीर्ष पर चढ़ने वाला = बालकृष्ण (गोविन्दा)।
  • मटकी तोड़ना = माखन प्राप्ति = आनन्द।

आध्यात्मिक अर्थ: (पूर्व batch 1516 में विस्तार) सामूहिक शक्ति, माखन=आनन्द, ऊँचाई=कठिन लक्ष्य, गिरना-उठना=साधना।

महाराष्ट्र परम्परा: दही हांडी मुख्यतः महाराष्ट्र-गुजरात में भव्य। 'गोविन्दा आला रे!' जयघोष। पुरस्कार/प्रतियोगिता। मुम्बई = सबसे प्रसिद्ध।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (दशम स्कन्ध), सूरसागर, ब्रजभाषा काव्य
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