विस्तृत उत्तर
दही हांडी = जन्माष्टमी के अगले दिन (नन्दोत्सव) = बालकृष्ण की माखन चोरी लीला:
पौराणिक आधार (भागवत पुराण दशम स्कन्ध)
गोकुल-वृन्दावन में बालकृष्ण ग्वाल सखाओं के साथ गोपियों का माखन-दही चुराते थे। गोपियाँ माखन ऊँचाई पर (छत से लटकी मटकी) रखती — कृष्ण ग्वालों के कंधों पर चढ़कर हांडी तोड़ते। गोपियाँ यशोदा से शिकायत करतीं — 'मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो' (सूरदास)।
दही हांडी = कृष्ण लीला का पुनराभिनय
- ▸ऊँचाई पर बँधी मटकी = गोपियों की मटकी।
- ▸मानव पिरामिड = ग्वाल सखा (एक-दूसरे के कंधों पर)।
- ▸शीर्ष पर चढ़ने वाला = बालकृष्ण (गोविन्दा)।
- ▸मटकी तोड़ना = माखन प्राप्ति = आनन्द।
आध्यात्मिक अर्थ: (पूर्व batch 1516 में विस्तार) सामूहिक शक्ति, माखन=आनन्द, ऊँचाई=कठिन लक्ष्य, गिरना-उठना=साधना।
महाराष्ट्र परम्परा: दही हांडी मुख्यतः महाराष्ट्र-गुजरात में भव्य। 'गोविन्दा आला रे!' जयघोष। पुरस्कार/प्रतियोगिता। मुम्बई = सबसे प्रसिद्ध।





