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त्योहार पूजा📜 धर्मसिंधु, स्मृतिग्रंथ, लोक परम्परा2 मिनट पठन

मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

खिचड़ी दान: सम्पूर्ण पोषण दान, उड़द=शनि (मकर स्वामी), बाबा गोरखनाथ (ऐतिहासिक), आयुर्वेद (सुपाच्य+उष्ण)। विधि: स्नान→सूर्य अर्घ्य→खिचड़ी+तिल+गुड़ दान। UP-बिहार='खिचड़ी पर्व'।

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विस्तृत उत्तर

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और भोग विशेष शास्त्रीय विधान:

  1. 1खिचड़ी = सम्पूर्ण अन्न: चावल + उड़द दाल + घी + मसाले = सम्पूर्ण पोषण। दान = सबसे उपयोगी दान — भूखे को सम्पूर्ण भोजन।
  1. 1उड़द = शनि: उड़द (काली दाल) = शनि ग्रह। मकर राशि = शनि स्वामी। मकर संक्रांति पर उड़द = शनि प्रसन्नता।
  1. 1ऐतिहासिक: बाबा गोरखनाथ (नाथ सम्प्रदाय) ने खिलजी आक्रमण काल में सैनिकों को खिचड़ी खिलाई — सरल, पौष्टिक, शीघ्र बनने वाला भोजन। तभी से मकर संक्रांति = 'खिचड़ी पर्व'।
  1. 1आयुर्वेद: शीत ऋतु = पाचन प्रबल। खिचड़ी = सुपाच्य + पौष्टिक + शरीर गर्म (उड़द+घी = उष्ण)।
  1. 1दान विधि: प्रातः स्नान → सूर्य अर्घ्य → खिचड़ी + तिल + गुड़ + वस्त्र ब्राह्मण/गरीबों को दान → संकल्प: 'मकरसंक्रान्तिपुण्यकाले खिचड़ी दानं करिष्ये।'

विशेष: उत्तर प्रदेश, बिहार = 'खिचड़ी' पर्व। गुजरात = 'उत्तरायण'। तमिलनाडु = 'पोंगल'। नाम भिन्न, भाव एक = सूर्य कृतज्ञता + अन्नदान।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, स्मृतिग्रंथ, लोक परम्परा
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