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त्योहार पूजा📜 पंजाबी लोक परम्परा, ऋग्वेद (अग्नि सूक्त)2 मिनट पठन

लोहड़ी पर अग्नि पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

लोहड़ी अग्नि पूजा: संध्या को लकड़ी-उपले अग्नि → परिक्रमा → तिल-गुड़-मूँगफली-रेवड़ी आहुति → 'आदर आये दलिद्दर जाये!' → लोहड़ी गीत ('सुंदर मुंदरिये...') → प्रसाद वितरण। नवजात/नवविवाहित विशेष। शीत विदाई, उत्तरायण स्वागत।

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विस्तृत उत्तर

लोहड़ी पौष मास की अंतिम रात (मकर संक्रांति से एक दिन पहले) मनाई जाती है। यह विशेषतः पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली क्षेत्र का प्रमुख पर्व है।

लोहड़ी अग्नि पूजा विधि

  1. 1अग्नि स्थापना: संध्याकाल में खुले स्थान (आँगन/चौराहे) में लकड़ी, उपलों (गोबर के कंडे) का ढेर लगाकर अग्नि प्रज्वलित करें।
  1. 1परिक्रमा: परिवार-मित्रों सहित अग्नि की परिक्रमा करें।
  1. 1आहुतियाँ: अग्नि में तिल, गुड़, मूँगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न (मक्के के दाने), गज़क की आहुतियाँ दें। 'आदर आये दलिद्दर जाये!' (समृद्धि आए, दरिद्रता जाए) बोलें।
  1. 1लोकगीत: 'सुंदर-मुंदरिये, होय!', 'लोहड़ी लई आ, दुल्ला भट्टी वालिया...' आदि लोहड़ी गीत गाएँ।
  1. 1प्रार्थना: अग्नि देव और सूर्य देव से प्रार्थना — शीत ऋतु बीते, समृद्धि आए, फसल अच्छी हो।
  1. 1प्रसाद: तिल-गुड़, रेवड़ी, गज़क, मूँगफली सबको बाँटें।
  1. 1नवजात शिशु/नवविवाहितों का विशेष: जिस घर में नई शादी या नया बच्चा हुआ हो, उस घर में लोहड़ी विशेष भव्यता से मनाई जाती है।

पौराणिक/लोक आधार: लोहड़ी का नाम 'लोई' (संत कबीर की पत्नी) या 'तिलोड़ी' (तिल+रोड़ी) से माना जाता है। दुल्ला भट्टी (मुगलकालीन वीर) की कथा लोहड़ी गीतों का केन्द्र है।

विशेष: लोहड़ी शीत ऋतु की विदाई और सूर्य उत्तरायण (मकर संक्रांति) के स्वागत का पर्व है। अग्नि = शीत नाश + अंधकार नाश + नवीन ऊर्जा।

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शास्त्रीय स्रोत
पंजाबी लोक परम्परा, ऋग्वेद (अग्नि सूक्त)
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