विस्तृत उत्तर
चैत्र नवरात्रि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी) हिन्दू नववर्ष के साथ आती है। इसे 'वासंतिक नवरात्रि' या 'बड़ी नवरात्रि' भी कहते हैं।
चैत्र नवरात्रि विशेष पूजा
1. कलश स्थापना: प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना (विधि पूर्ववत)। जौ बोएँ।
1नव दुर्गा पूजन (प्रतिदिन अलग देवी)
- ▸दिन 1: शैलपुत्री। दिन 2: ब्रह्मचारिणी। दिन 3: चन्द्रघण्टा।
- ▸दिन 4: कूष्माण्डा। दिन 5: स्कन्दमाता। दिन 6: कात्यायनी।
- ▸दिन 7: कालरात्रि। दिन 8: महागौरी। दिन 9: सिद्धिदात्री।
3. दुर्गा सप्तशती पाठ: पूरे 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती (चण्डीपाठ) का सम्पूर्ण पाठ — 13 अध्याय, 700 श्लोक। विभाजन: पहले दिन 1, दूसरे-तीसरे 2-3, चौथे 4, पाँचवें-आठवें 5-8, नौवें 9-13।
4. नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — प्रतिदिन कम से कम 108 बार जप।
2चैत्र की विशेषता
- ▸हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत) इसी दिन आरम्भ होता है।
- ▸गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र), उगादि (दक्षिण), नवरेह (कश्मीर) भी इसी दिन।
- ▸चैत्र नवरात्रि में ऋतु परिवर्तन (शीत→वसंत) होता है — शरीर शुद्धि (उपवास) इसलिए भी महत्वपूर्ण।
6. अष्टमी/नवमी पूजा: दुर्गाष्टमी पर हवन और कन्या पूजन। रामनवमी भी चैत्र नवरात्रि की नवमी है — श्रीराम जन्मोत्सव।
7. कन्या पूजन: 9 कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजन, भोजन, वस्त्र, दक्षिणा।
8. हवन और विसर्जन: नवमी/दशमी पर हवन। कलश विसर्जन। जवारे (उगे जौ) विसर्जित करें या प्रसाद के रूप में बाँटें।





