विस्तृत उत्तर
नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवताओं की विशेष पूजा का विधान है।
नाग पूजा विधि
- 1प्रातःकाल स्नान: शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- 1नाग चित्र/प्रतिमा: दीवार पर गेरू या हल्दी से नाग का चित्र बनाएँ, या चाँदी/मिट्टी का नाग बनाकर पूजा करें। कुछ क्षेत्रों में बाँबी (सर्प बिल) की पूजा की जाती है।
- 1पूजन: नाग देवता को दूध, दूर्वा, पुष्प, अक्षत, चन्दन, धूप, दीपक, लावा (भुने चावल), खीर का नैवेद्य अर्पित करें।
- 1नाग मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुकिनागाय नमः।' अनन्त, वासुकि, शेष, पद्म, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक — अष्टनागों का स्मरण करें।
- 1नाग स्तोत्र: 'अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।'
- 1नाग कथा: नाग पंचमी व्रत कथा का श्रवण/पाठ।
- 1क्षमा प्रार्थना: सर्पों से क्षमा माँगें — 'यदि हमसे किसी सर्प को कष्ट पहुँचा हो तो क्षमा करें।'
विशेष: इस दिन जमीन खोदना वर्जित है (नागों के बिल नष्ट होने का भय)। लोहे की कड़ाही में भोजन न पकाएँ। कुछ क्षेत्रों में सर्प को जीवित दूध पिलाने की प्रथा है — किन्तु वास्तव में सर्प दूध नहीं पीते और उन्हें जबरदस्ती दूध पिलाना उनके लिए हानिकारक है। दूध नाग प्रतिमा/चित्र पर अर्पित करना ही उचित है।





