विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में जागरण (रात्रि जागकर देवी उपासना) अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विशेषतः अष्टमी या नवमी की रात जागरण का विशेष विधान है।
जागरण विधि
1. स्थान सज्जा: पूजा स्थल को फूलों, तोरण, दीपकों से सजाएँ। अखण्ड ज्योति प्रज्वलित रखें।
2. देवी पूजन: सर्वप्रथम देवी की विधिवत पूजा-आरती। धूप-दीप-नैवेद्य अर्पित करें।
3. दुर्गा सप्तशती पाठ: सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक) का पाठ जागरण की रात सबसे उत्तम कर्म है। यदि सम्पूर्ण पाठ सम्भव न हो तो सिद्धकुंजिका स्तोत्र, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र का पाठ करें।
4. भजन-कीर्तन: देवी भजन, माता के गीत, जागरण गीत गाएँ। 'ऐ मेरी शेरांवालिए...', 'बिगड़ी बना दे माता...' आदि लोकप्रिय जागरण गीत।
5. नवार्ण मंत्र जप: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — नवार्ण मंत्र का जप सबसे शक्तिशाली देवी मंत्र है।
6. देवी कथा श्रवण: देवी भागवत या मार्कण्डेय पुराण की कथाएँ सुनें — महिषासुर मर्दिनी, शुम्भ-निशुम्भ वध आदि।
7. ध्यान: मध्यरात्रि में देवी का ध्यान। 'या देवी सर्वभूतेषु...' मंत्र मानसिक जप।
8. प्रातःकाल: ब्रह्म मुहूर्त में देवी आरती। प्रसाद वितरण। कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी)।
जागरण नियम: सात्त्विक रहें, नींद न लें, बातचीत कम करें — भजन और जप में ही समय बिताएँ। तामसिक गतिविधियों (मांसाहार, मदिरा, अश्लील गीत) से दूर रहें।
विशेष: जागरण = 'जागना' = आध्यात्मिक जागृति। बाहर जागने के साथ-साथ भीतर (आत्मा) का जागरण ही वास्तविक जागरण है।





