विस्तृत उत्तर
रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) पर बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बाँधती है। इसका शास्त्रीय मंत्र अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली है।
रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।'
अर्थ: जिस रक्षा सूत्र से महाबली दानवराज बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बाँधती/बाँधता हूँ। हे रक्षे (रक्षा सूत्र)! तू अडिग रहना, डगमगाना नहीं।
पौराणिक सन्दर्भ: जब राजा बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर बलि को पाताल भेजा। उस समय देवी लक्ष्मी ने बलि को रक्षा सूत्र बाँधकर वापस अपना पति (विष्णु) प्राप्त किया। इसी घटना से रक्षाबंधन का आरम्भ माना जाता है।
रक्षाबंधन विधि
- 1भाई पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठे।
- 2बहन थाली में दीपक, रोली, अक्षत, राखी, मिठाई रखे।
- 3भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएँ।
- 4उपरोक्त मंत्र ('येन बद्धो बलिराजा...') बोलते हुए दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बाँधें।
- 5भाई को मिठाई खिलाएँ।
- 6भाई बहन को रक्षा का वचन और उपहार/दक्षिणा दे।
- 7आरती उतारें।
शुभ मुहूर्त: अपराह्न काल (दोपहर बाद) रक्षाबंधन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। भद्रा काल में राखी नहीं बाँधनी चाहिए।
विशेष: यही मंत्र ब्राह्मण यजमान को कलावा (मौली) बाँधते समय भी बोलते हैं। रक्षा सूत्र = रक्षा का बन्धन — यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, गुरु-शिष्य, पुरोहित-यजमान सभी में प्रयुक्त होता है।





