ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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त्योहार पूजा📜 वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड), रामचरितमानस (बालकाण्ड), स्कन्द पुराण2 मिनट पठन

रामनवमी पर राम जन्म की पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

रामनवमी: व्रत → प्रातः राम दरबार अभिषेक → दोपहर 12 बजे विशेष पूजा-जयघोष (जन्म समय) → पालना/झूला → रामचरितमानस बालकाण्ड ('भए प्रगट कृपाला...') → 'ॐ रामाय नमः' जप → आरती → प्रसाद-दान।

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विस्तृत उत्तर

रामनवमी चैत्र शुक्ल नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है।

रामनवमी पूजा विधि

1. व्रत: रामनवमी पर व्रत रखें — फलाहार या निर्जला।

1प्रातः पूजा

  • स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण।
  • श्रीराम (या राम दरबार — राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान) की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
  • पंचामृत से अभिषेक।
  • चन्दन, तुलसी, पीले पुष्प, अक्षत अर्पित करें।

2मध्याह्न पूजा (दोपहर 12 बजे)

श्रीराम का जन्म मध्याह्न (दोपहर) में हुआ था। अतः दोपहर 12 बजे विशेष पूजा, आरती और जयघोष — 'श्रीरामचन्द्र की जय!'। पालना (झूला) सजाकर बालराम लाला को झुलाएँ।

4. रामचरितमानस पाठ: बालकाण्ड में राम जन्म प्रसंग का पाठ — 'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी...'।

5. राम नाम जप: 'श्रीराम जय राम जय जय राम' या 'ॐ रामाय नमः' का जप।

6. आरती: 'आरती कीजै रामलला की...' या 'श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन...'।

7. सुन्दरकाण्ड/अखण्ड रामायण: कुछ परम्पराओं में नवमी से पूर्व नौ दिन का रामायण पाठ (रामनवरात्र) होता है।

8. प्रसाद: पंजीरी, फल, खीर, पंचामृत।

9. दान: अन्नदान, वस्त्रदान, पुस्तक दान।

विशेष: अयोध्या, चित्रकूट, रामेश्वरम, हम्पी में रामनवमी विशेष भव्यता से मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि की नवमी और रामनवमी एक ही दिन होती हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड), रामचरितमानस (बालकाण्ड), स्कन्द पुराण
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