विस्तृत उत्तर
रामनवमी चैत्र शुक्ल नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है।
रामनवमी पूजा विधि
1. व्रत: रामनवमी पर व्रत रखें — फलाहार या निर्जला।
1प्रातः पूजा
- ▸स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण।
- ▸श्रीराम (या राम दरबार — राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान) की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
- ▸पंचामृत से अभिषेक।
- ▸चन्दन, तुलसी, पीले पुष्प, अक्षत अर्पित करें।
2मध्याह्न पूजा (दोपहर 12 बजे)
श्रीराम का जन्म मध्याह्न (दोपहर) में हुआ था। अतः दोपहर 12 बजे विशेष पूजा, आरती और जयघोष — 'श्रीरामचन्द्र की जय!'। पालना (झूला) सजाकर बालराम लाला को झुलाएँ।
4. रामचरितमानस पाठ: बालकाण्ड में राम जन्म प्रसंग का पाठ — 'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी...'।
5. राम नाम जप: 'श्रीराम जय राम जय जय राम' या 'ॐ रामाय नमः' का जप।
6. आरती: 'आरती कीजै रामलला की...' या 'श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन...'।
7. सुन्दरकाण्ड/अखण्ड रामायण: कुछ परम्पराओं में नवमी से पूर्व नौ दिन का रामायण पाठ (रामनवरात्र) होता है।
8. प्रसाद: पंजीरी, फल, खीर, पंचामृत।
9. दान: अन्नदान, वस्त्रदान, पुस्तक दान।
विशेष: अयोध्या, चित्रकूट, रामेश्वरम, हम्पी में रामनवमी विशेष भव्यता से मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि की नवमी और रामनवमी एक ही दिन होती हैं।
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