विस्तृत उत्तर
बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) विद्या की देवी माँ सरस्वती की उपासना का प्रमुख पर्व है।
सरस्वती पूजा विधि
1. सज्जा: पीले वस्त्र धारण करें (पीला = बसंत-ज्ञान का रंग)। पूजा स्थल पर श्वेत/पीला कपड़ा बिछाएँ।
2. प्रतिमा स्थापना: सरस्वती माँ की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें — श्वेत वस्त्रधारी, वीणाधारिणी, पुस्तक-माला सहित। श्वेत पुष्प, पीले पुष्प अर्पित करें।
3. षोडशोपचार पूजन: पंचामृत स्नान, चन्दन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
4. मंत्र: 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' (बीज मंत्र)। 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता...' (सरस्वती वंदना)।
5. पुस्तक-कलम पूजन: विद्यार्थी अपनी पुस्तकें, कॉपी, कलम-दवात को सरस्वती के चरणों में रखकर पूजा करें।
6. विद्यारम्भ: इस दिन बच्चों का विद्यारम्भ (पहली बार अक्षर लिखना) अत्यंत शुभ माना जाता है।
7. वाद्य पूजन: संगीत वाद्य (वीणा, सितार, तबला आदि) की पूजा — सरस्वती संगीत की भी देवी हैं।
8. सरस्वती स्तोत्र/सूक्त: ऋग्वेद का सरस्वती सूक्त, सरस्वती स्तोत्र, सरस्वती चालीसा का पाठ।
9. आरती और प्रसाद: आरती। प्रसाद में बूँदी, मिश्री, श्वेत मिठाई, केसर खीर।
10. पतंग उड़ाना: बसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने की परम्परा — सूर्य और बसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक।
विशेष: पूर्वी भारत (बंगाल, बिहार, ओडिशा) में बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा बहुत भव्यता से मनाई जाती है — प्रतिमा स्थापना, पण्डाल, विसर्जन। उत्तर भारत में पीले व्यंजन (केसर हलवा, मीठे चावल) बनाने की परम्परा।





