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त्योहार पूजा📜 वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा (तुलसीदास)2 मिनट पठन

हनुमान जयंती पर पूजा की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

हनुमान जयंती: चैत्र पूर्णिमा → सिन्दूर-चमेली तेल-लाल पुष्प → बूँदी लड्डू-गुड़ चना भोग → हनुमान चालीसा 7+ बार → सुन्दरकाण्ड → बजरंग बाण → 'ॐ हनुमते नमः' → आरती → प्रदक्षिणा → दान। ब्रह्मचारियों हेतु विशेष फलदायी।

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विस्तृत उत्तर

हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत) को बजरंगबली के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है।

हनुमान जयंती पूजा विधि

1. प्रातःकाल: स्नान करके लाल/केसरिया वस्त्र धारण करें।

1हनुमान प्रतिमा पूजन

  • सिन्दूर लगाएँ (हनुमान जी को सिन्दूर अत्यंत प्रिय)।
  • चमेली तेल अर्पित करें।
  • लाल पुष्प (गुड़हल), माला चढ़ाएँ।
  • बूँदी लड्डू, गुड़-चना, केला भोग लगाएँ।

3. हनुमान चालीसा पाठ: तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा का कम से कम 7 बार (या 11, 21, 108 बार) पाठ।

4. सुन्दरकाण्ड पाठ: रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड का सम्पूर्ण पाठ — हनुमान जी की सबसे महिमामयी लीला।

5. बजरंग बाण: शक्ति और रक्षा हेतु बजरंग बाण का पाठ।

6. हनुमान अष्टक: 'बालसमय रवि भक्षि लियो तब...' — हनुमान अष्टक पाठ।

7. मंत्र जप: 'ॐ हनुमते नमः' या 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हनुमते नमः।'

8. आरती: 'आरती कीजै हनुमान लला की...'।

9. प्रदक्षिणा: हनुमान मंदिर की 3, 7 या 11 प्रदक्षिणा।

10. दान: गुड़, चना, लड्डू, लाल वस्त्र, सिन्दूर, तेल गरीबों को दान।

विशेष: ब्रह्मचर्य पालने वालों के लिए हनुमान पूजा विशेष फलदायी। शनिवार और मंगलवार को भी हनुमान पूजा का विधान है। दक्षिण भारत (तमिलनाडु) में मार्गशीर्ष अमावस्या पर हनुमान जयंती मनाई जाती है।

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शास्त्रीय स्रोत
वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा (तुलसीदास)
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