विस्तृत उत्तर
दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी के साथ सरस्वती की पूजा का विधान एक गहन आध्यात्मिक सिद्धांत पर आधारित है:
1. धन + विद्या = सम्पूर्ण समृद्धि: लक्ष्मी = धन-सम्पत्ति। सरस्वती = ज्ञान-विद्या। केवल धन पर्याप्त नहीं — धन का सदुपयोग ज्ञान (सरस्वती) से ही होता है। ज्ञान बिना धन = विनाश।
2. व्यापार दर्शन: दीपावली पर व्यापारी नये बहीखाते आरम्भ करते हैं। बहीखाते = लेखन = सरस्वती का क्षेत्र। तिजोरी = लक्ष्मी। दोनों मिलकर ही सफल व्यापार सम्भव।
3. त्रिदेवी एकता: लक्ष्मी (धन), सरस्वती (ज्ञान), काली/दुर्गा (शक्ति) — ये तीनों मिलकर पूर्ण शक्ति हैं। दीपावली पर तीनों की पूजा = सम्पूर्ण शक्ति उपासना। (काली = लेखनी/दवात पर, सरस्वती = बहीखाते पर, लक्ष्मी = तिजोरी पर।)
4. गणेश = बुद्धि + रिद्धि-सिद्धि: गणेश बुद्धि के देवता हैं और उनकी पत्नियाँ रिद्धि-सिद्धि हैं। गणेश = ज्ञान का प्रतीक (सरस्वती से समानता)। गणेश + लक्ष्मी + सरस्वती = बुद्धि + धन + विद्या।
5. कुबेर सम्बंध: दीपावली में कुबेर (धन रक्षक) की भी पूजा होती है। कुबेर + लक्ष्मी + सरस्वती = धन अर्जन + धन रक्षण + धन का सदुपयोग।
शास्त्रीय आधार: दीपावली की सम्पूर्ण पूजा में पाँच पूजन होते हैं — गणेश, महालक्ष्मी, महाकाली (लेखनी पर), सरस्वती (बहीखाते पर), कुबेर (तिजोरी पर)। यह पंचपूजन का विधान अत्यंत प्राचीन है।





