विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में अष्टमी (8वाँ दिन) और नवमी (9वाँ दिन) हवन/पूर्णाहुति का विधान है।
हवन विधि
1तैयारी
- ▸हवन कुण्ड स्थापित करें (मिट्टी/ताँबे का)।
- ▸हवन सामग्री: तिल, जौ, घी, चावल, गुग्गुल, कमलगट्टा, नवग्रह सामग्री, खीर/गुड़।
- ▸समिधा: आम/पलाश/बिल्व की लकड़ी + गोबर कण्डे।
2क्रम
- ▸गणपति पूजन + अग्नि प्रज्वलन।
- ▸नवग्रह आहुति (9 ग्रहों के मंत्रों से)।
- ▸दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से आहुति — प्रत्येक मंत्र/श्लोक के अन्त में 'स्वाहा' बोलकर घी-सामग्री अर्पित।
- ▸नवार्ण मंत्र ('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे') से 108 आहुतियाँ।
- ▸प्रत्येक नवदुर्गा के नाम से एक-एक आहुति।
- ▸पूर्णाहुति: नारियल + वस्त्र + सामग्री = अन्तिम आहुति।
3अष्टमी vs नवमी
- ▸अष्टमी: महाष्टमी — कन्या पूजन + हवन। कुछ परम्पराओं में अष्टमी को हवन।
- ▸नवमी: महानवमी — कन्या पूजन + हवन + पूर्णाहुति। कई परम्पराओं में नवमी को पूर्णाहुति।
- ▸दोनों दिन हवन मान्य — कुलाचार अनुसार निर्णय लें।
4हवन के बाद
- ▸कन्या भोज/पूजन।
- ▸ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा।
- ▸व्रत पारण (नवमी या दशमी को)।





