विस्तृत उत्तर
दुर्गा पूजा का महत्व दुर्गा सप्तशती की फलश्रुति (13वाँ अध्याय) और देवी भागवत में वर्णित है:
सप्तशती की फलश्रुति में देवी का वचन
दुर्गा सप्तशती के 13वें अध्याय में देवी स्वयं फल बताती हैं —
> 'या श्रद्धया मम महात्म्यं शृणुयाद्भक्तिमान् नरः। स पापान्मुच्यते सद्यः शोकदारिद्र्यनाशनम्।'
— जो श्रद्धापूर्वक मेरे महात्म्य का श्रवण करता है, वह पाप से मुक्त होता है, शोक और दारिद्र्य का नाश होता है।
दुर्गा पूजा के मुख्य लाभ (फलश्रुति के अनुसार)
- 1पापों का नाश: सप्तशती पाठ और श्रवण से पापों का क्षय
- 2रोग नाश: रोगी के लिए पाठ — आरोग्य लाभ
- 3शत्रु विनाश: शत्रुओं की शक्ति क्षीण होती है
- 4भय नाश: सभी प्रकार के भय दूर होते हैं
- 5धन-समृद्धि: लक्ष्मी की कृपा
- 6पुत्र-पौत्र: संतान सुख
- 7मोक्ष: अंततः मुक्ति
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
- ▸बंगाल, ओडिशा में दुर्गा पूजा राष्ट्रीय पर्व — 4-5 दिन
- ▸शरद नवरात्रि — पूरे भारत में
- ▸दुर्गा महिषासुर मर्दिनी — धर्म की अधर्म पर विजय
दार्शनिक महत्व
देवी सर्वव्यापी है — 'या देवी सर्वभूतेषु...।' (देवी सर्वभूतस्तुति, सप्तशती 5.77-87)
मनुष्य में शक्ति, बुद्धि, दया — सब देवी के रूप हैं।
देवी भागवत
दुर्गापूजनमात्रेण नाशो भवति पातकम्। प्राप्नोति जन्मजनिताः पुण्यं सत्कृत्यसम्भवम्।' — दुर्गा पूजन मात्र से जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।





