विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में कन्या पूजन का अत्यंत गहरा पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है:
पौराणिक कारण
देवी भागवत पुराण में कहा गया है — 'कन्यासु देवी वसति' — देवी दुर्गा कन्याओं (कुमारी बालिकाओं) में निवास करती हैं। इसलिए कन्याओं की पूजा करना साक्षात् देवी की पूजा है।
दार्शनिक अर्थ
कुमारी कन्या पवित्रता, निष्पाप भाव और दैवी शक्ति का प्रतीक है। वह माया और अहंकार से रहित होती है — इसलिए उसमें देवी शक्ति सर्वाधिक प्रकट होती है।
कन्या पूजन की विधि
- 12 से 10 वर्ष की कन्याओं को आमंत्रित करें
- 2उनके पाँव धोएं, आसन पर बैठाएं
- 3माथे पर कुमकुम/रोली लगाएं
- 4पुष्प अर्पित करें
- 5चुनरी पहनाएं
- 6हलवा-पूरी-चना का भोग लगाएं
- 7दक्षिणा और उपहार दें
- 8पाँव छूकर आशीर्वाद लें
कन्याओं की संख्या और नाम
देवी भागवत के अनुसार विभिन्न संख्या का अलग-अलग फल है:
- ▸2 कन्या = भय नाश
- ▸3 कन्या = सुख-समृद्धि
- ▸4 कन्या = धन लाभ
- ▸5 कन्या (पंचकन्या) = शत्रु नाश
- ▸6 कन्या = राज्य/सत्ता लाभ
- ▸7 कन्या = सर्वकार्य सिद्धि
- ▸8 कन्या = विशेष ऐश्वर्य
- ▸9 कन्या (नवकन्या) = सर्वोत्तम — नवदुर्गा स्वरूप
9 कन्याओं के नाम (देवी रूप)
कुमारी, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, काली, चंडिका, शांभवी, दुर्गा, भद्रा
समय: अष्टमी या नवमी — दोनों में से कोई एक या दोनों दिन।





