विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में कलश स्थापना की विधि धर्म सिंधु और देवी भागवत पुराण में वर्णित है:
कलश स्थापना का समय
प्रतिपदा (नवरात्रि के पहले दिन) — ब्रह्ममुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में। अभिजीत मुहूर्त = दोपहर 11:48 से 12:36 बजे के आसपास (तिथि और स्थान के अनुसार भिन्न)।
कलश स्थापना सामग्री
- ▸मिट्टी का या तांबे/पीतल का कलश
- ▸गंगाजल / शुद्ध जल
- ▸आम के पाँच पत्ते (पंचपल्लव)
- ▸सुपारी
- ▸सिक्का (तांबे का)
- ▸नारियल
- ▸लाल कपड़ा (कलश ढकने के लिए)
- ▸जौ (जवारे) बोने के लिए मिट्टी
- ▸सप्तधान्य (7 अनाज)
कलश स्थापना की क्रमिक विधि
1स्थान तैयारी
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चौकी रखें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
2जवारे (जौ) बोना
चौकी पर मिट्टी की परत रखें और जौ के बीज बोएं — ये जवारे नवरात्रि के 9 दिनों में उगेंगे।
3कलश भरना
कलश में गंगाजल भरें। कलश में रखें — सिक्का, सुपारी और हल्दी की गाँठ।
4पंचपल्लव
कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते लगाएं।
5नारियल
नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें और कलश के ऊपर रखें — देवी का स्वरूप मानें।
6कलश स्थापना मंत्र
> 'ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दवः। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।'
7देवी आवाहन
कलश में देवी के आवाहन के बाद पूजा आरंभ करें।
नवरात्रि में नित्य कलश पूजा
प्रतिदिन कलश पर जल, पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें। जवारों को जल दें।
विसर्जन
नवमी को देवी विसर्जन के साथ कलश विसर्जित करें। जवारों को नदी में प्रवाहित करें या बाग में रखें।





